Consumer Forum : 5 रूपए के बिस्कुट के 10 रूपए वसूले और कैरीबैग के 14 रुपए वसूलने वाले बिक्रीकर्ता पर उपभोक्ता फोरम ने लगाया 20 और 25 हजार का जुर्माना

Consumer Forum : रेवाड़ी शहर मे जिला उपभोक्ता फोरम ने 5 रूपए के बिस्कुट के 10 रूपए वसूले और कैरीबैग के 14 रुपए वसूलने वाले बिक्रीकर्ता पर  20 और 25 हजार का जुर्माना लगया था। मेगा मार्ट और स्टोर पर  ...

Consumer Forum : रेवाड़ी शहर मे जिला उपभोक्ता फोरम ने 5 रूपए के बिस्कुट के 10 रूपए वसूले और कैरीबैग के 14 रुपए वसूलने वाले बिक्रीकर्ता पर  20 और 25 हजार का जुर्माना लगया था।

मेगा मार्ट और स्टोर पर  उपभोक्ता फोरम ने लगाया जुर्माना

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केस नंबर 1 : – रेवाड़ी शहर के रहने वाले सुनील कुमार ने 11 नवंबर 2019 को मेगा मार्ट से सामान खरीदा था। जिसमें दो बिस्कुट के पैकेट भी थे। मार्ट की तरफ से 5 रूपय के बिस्कुट के पैकेट के 10 रूपय वसूल किए गए थे। जिसके बाद सुनील कुमार ने एडवोकेट कैलाशचंद की मदद से उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 13 जून 2023 को जिला उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) कमीशन संजय कुमार खंडुजा और ऋषिदत्त कौशिक की कोर्ट ने फैसला सुनाते हुये विशाल मेगा मार्ट पर 9 प्रतिशत ब्याज सहित 25 हजार रूपय का जुर्माना लगाया। जबकि 5 हजार रूपय कानूनी प्रक्रिया में खर्च हुई राशि के रूप में चुकाने के आदेश दिये।

केस नंबर – 2  इसी तरह से एक ग्राहक को खराब सोनपपड़ी बेचने वाले स्टोर पर उपभोक्ता फोरम ने दस हजार का जुर्माना लगाया है। एडवोकेट कैलाश चंद ने बताया कि रेवाड़ी शहर के रहने वाले राजपाल यादव ने    दस नंबर 2022 को रेवाड़ी शहर के झज्जर चौक स्थित यशोधरा फैमली स्टोर से सोन पपड़ी के दो पैकेट 450/- ग्राम 110/- रुपये प्रत्येक के हिसाब से खरीदे थे। सोन पपड़ी की क्वालिटी खराब होने पर खरीददार ने इसकी शिकायत बिक्रीकर्ता से की परन्तु बिक्रीकर्ता ने समस्या का समाधान नहीं किया।  जिस कारण शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत की,  जिसके बाद संजय कुमार खंडूजा  की कोर्ट  ने दोनों पक्षों को सुनकर 8 जून 2023 को फैसला सुनाया कि सोन पपड़ी की कीमत को 9प्रतिशत ब्याज सहित वापिस किया जाएँ और वाद खर्च 10,000/- अलग से अदा किया जाएँ।

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केस नंबर -3 कैरी बैग के नाम पर वसूल गए थे 14 रूपय , 20 हजार को लगाया जुर्माना । इस मामले में  रेवाड़ी के रहने वाले दीपक सैनी 3 जनवरी 2021 को विशाल मेगा मार्ट से 1587 रूपय का सामान खरीदा था। सामान खरीदने के बाद ग्राहक ने कैरी बैग देने को कहा, लेकिन बिक्रीकर्ता ने प्लास्टिक के कैरी बैग 14 रूपय अलग से वसूल कर लिये। जबकि खरीदा हुआ सामान सुविधा सहित लेकर जाने के लिये कैरी बैग निशुल्क देने का प्रावधान है। एडवोकेट कैलाशचंद ने बताया कि फ्री कैरी बैग देने का प्रावधान है और इस मामले में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2011 के खिलाफ भी प्लास्टिक का कैरी बैग दिया गया ।

25 मई को जिला उपभोक्ता फोरम कमशीन संजय कुमार खंडूजा व ऋषि दत्त कौशिक की कोर्ट ने  दोनों तरफ की दलील सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाया कि विशाल मेगा मार्ट रेवाड़ी ने शिकायतकर्ता दीपक सैनी से कैरी बैग के नाम से जो चार्ज वसूले थे वो गलत है। इसलिए गलत चार्ज वसूलने पर बिक्रीकर्त्ता को 20,000/- रुपये मुआवजा राशि देने के आदेश दिये।  साथ ही 11000/- रुपये वाद खर्च के 9% ब्याज सहित,  जिस दिन से वाद दायर हुआ तब से एक महीने के अंदर शिकायतकर्ता को चुकाने,  एक महीने बाद 12% प्रतिशत ब्याज की राशि सहित चुकता करने के आदेश दिये।

उपभोक्ता सीधे उपभोक्ता फोरम में लगा सकते है शिकायत

हम अपने दैनिक जीवन मे बहुत सारी वस्तुएं किसी दुकान, फर्म, कंपनी से खरीद करते हैं, ओर उस खरीददारी से कई बार विक्रेता हमसे धोखा करता है, इसलिय आमजन को उपभोक्ता कानून का ज्ञान हो तो वो विक्रेता के धोखे से बच सकता बल्कि खुद के साथ हुए धोखे की एवज में विक्रेता से हुए नुकसान की भरपाई भी वसूल कर सकता है।  हर जिले में उपभोक्ता फोरम भी एक अदालत है और उसे कानून द्वारा एक सिविल कोर्ट को दी गई शक्तियों की तरह ही शक्तियां प्राप्त हैं। उपभोक्ता अदालतों की जननी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,1986 है। इस अधिनियम के साथ उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) की शुरुआत हुई।

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उपभोक्ता का मतलब ग्राहक होता है। पहले इंडिया में उपभोक्ता के लिए कोई परफेक्ट लॉ नहीं था । जो सिर्फ ग्राहकों से जुड़े हुए मामले ही निपटाए। किसी भी ग्राहक के ठगे जाने पर उसे सिविल कोर्ट में मुकदमा लगाना होता था। इंडिया में सिविल कोर्ट पर काफी कार्यभार है।  ऐसे में ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।  फिर सिविल कोर्ट में मुकदमा लगाने के लिए कोर्ट फीस भी अदा करनी होती थ।  इस तरह ग्राहकों पर दुगनी मार पड़ती थी, एक तरफ वह ठगे जाते थे और दूसरी तरफ उन्हें रुपए खर्च करके अदालत में न्याय मांगने के लिए मुकदमा लगाना पड़ता था।

इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 बनाया गया है।  जिसे इंग्लिश में कंज़्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट ,1986 कहा जाता है। अभी हाल ही में इस एक्ट में 2019 में काफी सारे संशोधन किए गए हैं। जिसने इस कानून को ग्राहकों के हित में और ज्यादा सरल कर दिया है। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को निम्न अधिकार प्रदान करता है- (क) वस्तुओं या सेवाओं की मात्रा, गुणवत्ता, शुद्धता, क्षमता, कीमत और मानक के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।

(ख) खतरनाक वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षित रहने का अधिकार (ग) अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं से संरक्षित रहने का अधिकार (घ) प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न प्रकार की वस्तुओं या सेवाओं की उपलब्धता किस तरह के केस लगाए जा सकते हैं- ग्राहकों से जुड़े सभी केस एक ग्राहक दुकानदार या फिर सेवा देने वाली व्यक्ति पर लगा सकता है। जैसे आप एक फ्रीज या कार खरीदते हैं और वह ख़राब निकलता है या उसमें कोई परेशानी आती है तब आप दुकानदार के खिलाफ मुकदमा लगा सकते हैं और उस कंपनी को पार्टी बना सकते हैं जिसने उस प्रोडक्ट को बनाया है। ऐसा मुकदमा आप उस शहर में लगा सकते हैं जहां पर आप रहते हैं और जहां अपने उस प्रोडक्ट को खरीदा है, इसके लिए आपको कंपनी के शहर में जाने की ज़रूरत नहीं है।

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2019 के कानून के तहत उपभोक्ताओं की मदद करने के लिए एक त्रिस्तरीय प्रणाली है: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग या (जिला आयोग) राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग या (राज्य आयोग) राष्ट्रीय आयोग हालांकि यह आयोग कोर्ट नहीं हैं, इनके समक्ष मुकदमा नहीं लगाया जाता है अपितु यह आयोग तो ग्राहकों के मामले अपने स्तर पर सुलझाने के प्रयास करते हैं। सबसे पहले यहां सूचना देकर शिकायत की जा सकती है जिससे यह संस्था अदालत में जाने से पहले प्राथमिक स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास करे।

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