Friday, January 21, 2022
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पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के साथ-साथ बिजली के दामों में भी हो सकती है बढ़ोतरी

इस महंगाई के दौर में जरुरी आवश्यकता के दामो में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है .जहाँ पेट्रोल ,डीजल के दाम कम होने का नाम नही ले रहे है. वही आज रसोई गैस के दामो में 100 रूपए का इजाफा हुआ है. इसी बीच यह भी खबर सामने आई है कि अब बिजली के दामों में भी बढ़ोतरी होने वाली है.अगर हम आसान शब्दों में कहें तो बिजली बनाने वाली कंपनियां अलग होती है. वहीं, आपके घर तक पहुंचाने वाली कंपनियां अलग होती है. लेकिन अब खबर आ रही है कि एनर्जी सेक्टर की कंपनियां भारी संकट के दौर से गुजर रही है. इन्हें उबराने  के लिए सरकार ने जो फैसला लिया है उससे आपके बिजली का बिल बढ़ना तय है.

 

जानिए नए नियम

 (1)  सरकार की लचर नीतियों के कारण बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ वितरण कंपनियां भी भारी घाटे से जूझ रही हैं. इससे देश का ऊर्जा क्षेत्र भारी संकट के दौर से गुजर रहा है.देश में सौर ऊर्जा के लिए भले रिकॉर्ड क्षमता स्थापित कर ली गई हो लेकिन यहां अब भी ऊर्जा का प्रमुख साधन कोयला ही है। इस मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का आयात करना पड़ता है.

 

(2) ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम बढ़ेंगे तो ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनियां की लागत बढ़ेगी। जाहिर है वे बिजली के दाम बढ़ाकर भरपाई करने की कोशिश करेंगी. ऑटोमैटिक पास-थ्रू मॉडल रूपी हथियार का इस्तेमाल करते हुए ये कंपनियां राज्यों को महंगी बिजली बेचेंगी. इसके बाद डिस्कॉम भी बिजली की दरें बढ़ाएंगे.

 

(3) सरल भाषा में समझें तो यह नई व्यवस्था पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस कीमतों में बदलाव की तरह काम करेगी. इससे जल्द ही आपको पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की तरह बिजली की कीमतों में आए दिन वृद्धि देखने को मिल सकती है.

 

(4) ऑटोमैटिक पास थ्रू मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब ईंधन का रेट बढ़ेगा तो राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम को बिजली खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी.राजस्थान में इसकी शुरुआत हो चुकी है. जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम ने बिजली उपभोक्ताओं पर 33 पैसे प्रति यूनिट का फ्यूल सरचार्ज लगाया है. इससे अगले तीन महीने तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं का बिजली का बिल बढ़कर आएगा.अन्य राज्य भी जल्द ही ऐसा कर सकते हैं.

 

(5) इस मामले में तेल विपणन कंपिनयों की नीयत भी जगजाहिर है। जबसे इन्हें कीमतें तय करने की आजादी मिली है तब से इनका तिमाही मुनाफा लगातार मजबूत होता जा रहा है. अपने कर्मचारियों की सुविधाओं पर यह जमकर खर्च कर रही हैं लेकिन जब कच्चे तेल में गिरावट का दौर आता है तो ऊंची लागत का बहाना मारकर सारे मुनाफे को पी जाती हैं. बता दें कि भारत में 60 फीसद से ज्यादा बिजली का उत्पादन फोसिल फ्यूल से होता है. अगर एक राज्य बिजली की कीमतों में वृद्धि करता है तो अन्य राज्य भी उसी राह पर चलेंगे.

Source:TV9

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