बिहार में खाद की सब्सिडी पर चल रहा खेल , पूर्व मंत्री कप्तान अजय के पास आया मैसेज तो लगाए आरोप

बिहार में खाद की सब्सिडी पर चल रहा खेल , पूर्व मंत्री कप्तान अजय के पास आया मैसेज तो लगाए आरोप

पूर्व मंत्री कैप्टेन अजय सिंह यादव ने बताया कि उनके पास पिछले 2 महीने में 3 बार फोन पर मैसेज आया है कि उन्होंने खाद का 45 किलोग्राम का कट्टा खरीदा है,  जिसकी सब्सीडी भी उनको मिली है। जबकि  कैप्टेन अजय सिंह द्वारा इस प्रकार की कोई खरीददारी ही नही कि गई है। जब पहली बार मैसेज आया तो अजय यादव ने उपायुक्त रेवाडी को भी फोन के माध्यम से इसकी जानकारी दी थी कि उनके पास इस तरह का मैसेज आया है। जिसके बाद इस तरफ कोई ध्यान नही दिया गया।  अभी गत 18 जून को दोबारा से फोन पर टेक्स्ट मैसेज आता है कि उन्होंने खाद का कट्टा खरीदा है जिसकी सब्सीडी उनको मिली है। इसके बाद कैप्टेन अजय सिंह यादव ने कृषि विभाग के एसडीओ दीपक यादव को इसकी शिकायत दी , तो पता चला कि बिहार में उनके आधार कार्ड की मदद से ये हुआ है। 

कैप्टेन अजय सिंह यादव ने आज 24 जून को लिखित शिकायत के माध्यम से रेवाडी पुलिस अधीक्षक को इसकी जानकारी देते हुए कसूरवार पर कानूनी कार्रवाई करने की बात रखी है। अजय यादव ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बिहार में नितिश कुमार की सरकार में क्या खेल चल रहा है। सरकार इस तरीके से किसी भी नंबर को डालकर सब्सीडी दिखा देती है। उन्होंने कहा कि आम जनता का तो पता नही क्या हाल बिहार में हो रहा होगा। 

कैप्टेन अजय सिंह ने कहा कि मौजूदा सरकार में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह तक की बातों पर ध्यान नही दिया जा रहा है या फिर केंद्रीय मंत्री का असर खत्म हो चुका है। मौजूदा सरकार में अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज ही नही है। अजय यादव ने कहा कि एक सप्ताह पहले राव इंद्रजीत सिंह ने रेवाडी की जर्जर हालत हो चुकी सडकों को एक सप्ताह में ठीक करने की बात कही थी। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी किसी अधिकारी ने वहां जाकर देखा तक नही, अखबारों ने भी इस खबर को छापा है। । जबकि ये सडक मात्र 2 किलोमीटर तक की भी नही है। इसका मतलब साफ है कि राव इंद्रजीत सिंह का असर खत्म हो चुका है। 

कैप्टेन अजय सिंह ने कहा कि गत 21 जून को भाजपा द्वारा सभी राज्यों में टीकाकरण दिवस नही बल्कि इवेंट मैनेजमेंट ड्रामा दिवस मनाया गया। मात्र एक दिन ही टीकाकरण करके सरकार क्या दिखाना चाहती थी। कोरोना के इस संकट काल में सरकार ने करोडों रूपये तो विज्ञापनों पर लगा दिए जबकि इस पैसे को कोविड के टीके खरीदे जा सकते थे। 

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