महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर क्या है जानिए, मुहूर्त और पूजन विधि

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है. सभी श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं. फाल्गुन महीने मे आने वाली कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा जाता है. बता दे कि हर महीने के ...

महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर क्या है जानिए, मुहूर्त और पूजन विधि

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है. सभी श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं. फाल्गुन महीने मे आने वाली कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा जाता है. बता दे कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि कहा जाता है. हर साल लगभग 12 शिवरात्रि आती है, इन्हीं 12 शिवरात्रिओं में एक महाशिवरात्रि होती है जिसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. महाशिवरात्रि को लेकर अनेक कथाएं प्रचलित है.

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कब है महाशिवरात्रि

पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था. पौराणिक कथाओं में लिखा गया है कि भगवान शंकर ने माता पार्वती के कठोर तप के बाद ही इसी दिन उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि 1 मार्च मंगलवार को है, यह मंगलवार सुबह 3:16 से शुरू होकर चतुर्दशी तिथि का समापन 2 मार्च बुधवार 10:00 बजे होगा. इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव को खुश करने के लिए बेलपत्र, बेर, चरणामृत आदि अर्पित करते हैं.

महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में अंतर क्या है जानिए, मुहूर्त और पूजन विधि

पूजन का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि के दिन पहले प्रहर की पूजा करने का शुभ मुहूर्त 1 मार्च शाम 6:21 से रात्रि 9:27 मिनट तक है. वहीं इसी दिन दूसरे प्रहर की पूजा 1 मार्च रात्रि 9:27 से 12:33 तक होगी. तीसरे प्रहर की पूजा 1 मार्च रात्रि 12:33 मिनट से सुबह 3:39 तक होगी. चौथे प्रहर की पूजा 2 मार्च सुबह 3:39 से 6:45 तक है. इसके बाद का समय 2 मार्च बुधवार सुबह 6:45 के बाद से हैं.

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पूजन विधि

बता दें कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद घर के पूजा स्थल पर जल से भरे कलश की स्थापना करें. भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा के समक्ष अक्षत, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, लौंग, इलायची, दूध, दही, शहद, घी, धतूरा, बेलपत्र, कमलगट्टा आदि भगवान को अर्पित करें. इसके बाद पूजन करें और अंत में आरती करें.

 

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