फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव का पार्थिव शरीर आज रेवाड़ी पहुँचा, जहाँ उनके पैतृक गाँव माजरा भालखी में सिद्धार्थ यादव का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. शहीद सिद्धार्थ यादव की अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में इलाके के लोग शामिल हुए .
सिद्धार्थ यादव के पिता ने कहा कि उनके बेटे की इच्छा हमेशा आगे बढ़ने की थी, सिद्धार्थ का सपना था कि वो आगे चलकर चीफ एयर मार्शल बने, वहीँ माँ ने कहा कि बेटे पर गर्व है, हर माँ को देश सेवा के लिए अपने बेटे को सेना में भेजना चाहिए.
बता दें कि गुजरात के जामनगर में बुधवार को भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश हो गया था. इस हादसे में हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए । जिनका पार्थिव शरीर आज रेवाड़ी पहुँचा.
पहले सिद्धार्थ का पार्थिव देह रेवाड़ी शहर के सेक्टर 18 स्थित उनके नए मकान पर ले जाया गया, इसी मकान पर इसी 23 मार्च को 28 वर्षित सिद्धार्थ की सगाई हुई थी. जिसके बाद 31 मार्च को वे रेवाड़ी से छुट्टी पूरी कर जामनगर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे। आज तिरंगे में लिपटकर शहीद सिद्धार्थ यादव का पार्थिव देह रेवाड़ी पहुँचा. रेवाड़ी सेक्टर 18 के बाद शहीद सिद्धार्थ यादव का पार्थिव देह नारनौल रोड़ स्थित माजरा भालखी ले जाया गया. जहाँ सैन्य सम्मान के साथ सिद्धार्थ यादव को अंतिम विदाई दी गई.
सिद्धार्थ ने 2016 में NDA की परीक्षा पास की थी। इसके बाद 3 साल का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने बतौर फाइटर पायलट वायुसेना जॉइन की थी। उन्हें 2 साल बाद प्रोमोशन मिला था, जिससे वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट बन गए थे।
सिद्धार्थ के परदादा बंगाल इंजीनियर्स में कार्यरत थे, जो ब्रिटिशर्स के अंडर आता था। सिद्धार्थ के दादा पैरा मिलिट्री फोर्सेस में थे। इसके बाद इनके पिता भी एयरफोर्स में रहे। सिद्धार्थ चौथी पीढ़ी थी, जो सेना में सेवाएं दे रही थीं।
शहीद सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव मूल रूप से रेवाड़ी के गांव भालखी माजरा के रहने वाले हैं। वह लंबे समय से रेवाड़ी में ही रह रहे हैं। बेटे की शादी के लिए ही उन्होंने सेक्टर-18 में घर बनाया था। इसी घर पर बेटे की शादी होनी थी।








