ना किताबे मिली ना पैसे आयें …कैसे पढेंगे बच्चे

रेवाड़ी:  सरकार की ओर से ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षा का दावा किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बीते चार माह से जिले के 645 स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को किताबें तक नहीं मिल ...

ना किताबे मिली ना पैसे आयें …कैसे पढेंगे बच्चे

रेवाड़ी:  सरकार की ओर से ऑनलाइन व ऑफलाइन शिक्षा का दावा किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बीते चार माह से जिले के 645 स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों को किताबें तक नहीं मिल पाई हैं। किताबों के बदले पैसे देने का वादा भी हुआ, लेकिन वह भी हवाई ही रहा। ऐसे में सवाल है कि किस तरह से बच्चे पढ़ाई कर पाएंगे। कोरोना काल में लंबे से समय से प्रभावित हो रही शिक्षा को देखते हुए भले ही स्कूलों को खोल दिया गया हो, लेकिन विद्यार्थी बिना किताबों के ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। शिक्षा सत्र के 4 महीने बीत जाने के बाद भी विद्यार्थियों को अभी तक निशुल्क में दी जाने वाली किताबें नहीं मिल पाई हैं।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक सरकार ने किताबें नहीं देने पर विद्यार्थियों को राशि मुहैया कराने का वादा किया था, लेकिन अभी तक न तो किताबें मिली और न ही राशि। कोरोना मामलों के कम होने के बाद 16 जुलाई से लगातार स्कूल खुल रहे हैं। अभिभावकों व विद्यार्थियों की मांग के बावजूद भी किताबें नहीं मिलने से पढ़ाई रुकी हुई है। बता दें कि शिक्षा के अधिकार के अनुसार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को पहली कक्षा से लेकर 8वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को निशुल्क में खाना, किताब व वर्दी की सुविधा प्रदान करना है। लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी जिले के 645 स्कूलों के विद्यार्थियों को अभी पुस्तकें मिलने का इंतजार है। सूत्रों की मानें तो करीब 45 फीसदी बच्चों को ही पुरानी किताबें मुहैया हो पाई हैं, जबकि यह भी पूरी नहीं मिली हैं।

 

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कक्षा अनुसार राशि देने का दावा

अब चार महीने बाद किताबों की उपलब्धता नहीं होने के कारण अब सरकार इन बच्चों के खातों में जल्द से जल्द पैसे डालने का दावा किया जा रहा है। इसके लिए कक्षा के अनुसार ही यह रकम विद्यार्थियों के खातों में डाली जाएगी, ताकि वे किताबें खरीद सकें। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इस पर काम कर देगी। कोरोना काल में नई पुस्तकों की छपाई नहीं हो पाई है। इसी कारण से शिक्षा विभाग ने बुक एक्सचेंज करने के निर्देश दिए। स्कूल में अपनी पुरानी कक्षा की पुस्तकें दे सकता है, जबकि अध्यापक इन पुस्तकों को कोविड प्रोटोकाल के तहत दिए निर्देशों की पालना करते हुए विद्यार्थी को देंगे। सूत्रों की मानें, तो करीब 45 फीसद बच्चों को ही इसका फायदा हुआ है, लेकिन इसमें स्थिति यह है कि इनको पूरी किताबें नहीं मिल पाई हैं।

 

एक विद्यार्थी को मिलेगें 300 रुपये:

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बच्चों को किताबों के नाम के 300 रुपये प्रति विद्यार्थी देने की घोषणा की थी। लेकिन ये पैसे भी अभी तक किसी बच्चे को नहीं मिले हैं। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि एनसीईआरटी की जो पुस्तकें सरकारी स्कूलों में लगाई जाती हैं। सरकार द्वारा दी जा रही उस राशि में इन पुस्तकों को नहीं खरीदा जा सकता है। इन किताबों का रेट दुकानों पर 1000 से लेकर 1500 तक मिलता है। जबकि सरकार द्वारा 300 रुपये प्रति विद्यार्थी ही दिए जाते हैं। ऐसे में कोरोना काल में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ता हुआ नजर आ रहा है। डीईईओ कपिल पूनिया ने बताया कि पुराने छात्रों की पुस्तकें अन्य छात्रों को दिलाई गई हैं। जिनको पुस्तकें नहीं मिली जल्द ही उनके खातों में राशि भेज दी जाएगी।

रेवाड़ी जिले में स्कूलों की संख्या

रेवाड़ी 176

बावल 157

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जाटूसाना 106

खोल 107

नाहड़ 90

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