1 मई से लागू होगा Toll Tax का नया नियम, वाहन चालकों को मिलेगा ये फायदा

GNSS यानी Global Navigation Satellite System एक ऐसा तकनीकी सिस्टम है जो सैटेलाइट्स की मदद से यह ट्रैक करेगा कि आपकी गाड़ी ने नेशनल हाईवे पर कितनी दूरी तय की। उसी आधार पर टोल की रकम तय होगी  यानी अब ...

GNSS यानी Global Navigation Satellite System एक ऐसा तकनीकी सिस्टम है जो सैटेलाइट्स की मदद से यह ट्रैक करेगा कि आपकी गाड़ी ने नेशनल हाईवे पर कितनी दूरी तय की। उसी आधार पर टोल की रकम तय होगी  यानी अब जितनी दूरी, उतना Toll Tax देना होगा।

कैसे करेगा काम?

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गाड़ी में ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) या डिवाइस लगेगी।  यह एक GPS ट्रैकर जैसा डिवाइस होगा जिसे आपकी गाड़ी में फिट किया जाएगा। सैटेलाइट के ज़रिए आपकी गाड़ी की मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी।

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टोल की गणना दूरी के अनुसार होगी

आप जितनी दूरी हाईवे पर तय करेंगे, उतनी ही राशि आपके डिजिटल वॉलेट या अकाउंट से कटेगी। कोई फ्लैट चार्ज नहीं, सिर्फ आपको रूट का भुगतान करना होगा। जैसे ही यात्रा पूरी होती है, टोल अपने-आप कट जाएगा। यह सिस्टम प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्पों को सपोर्ट करेगा।

FASTag सिस्टम का क्या होगा?

FASTag को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। शुरुआती चरण में GNSS और FASTag दोनों साथ चल सकते हैं, लेकिन आगे चलकर सिर्फ GNSS प्रणाली ही काम करेगी।

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यात्रियों को मिलेगा ये फायदा

इस प्रणाली से  समय की बचत होगी व टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। सिर्फ जितनी दूरी चले उतना ही टोल देना होगा। इससे जाम से राहत मिलेगी व टोल बूथ पर लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 कब से लागू होगा?

1 मई 2025 से देशभर में इसे लागू किया जा रहा है। पहले कुछ हाईवे पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगा। फिर इसे धीरे-धीरे पूरे देश में फैलाया जाएगा।

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