सीएम ने किसानों को दी मनोहर सौगात, किसान हित में ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल किया लांच

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह फसल नुकसान की स्थिति में आवेदन, सत्यापन और मुआवजा प्रदान करने की प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रदेश सरकार का ऐतिहासिक कदम है। इससे पहले ...

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह फसल नुकसान की स्थिति में आवेदन, सत्यापन और मुआवजा प्रदान करने की प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रदेश सरकार का ऐतिहासिक कदम है। इससे पहले किसानों को फसल खराबे का मुआवजा मैनुअल दिया जाता रहा है और सालों से चली आ रही मैनुअल मुआवजा प्रणाली को बदलते हुए अब इस पोर्टल के माध्यम से यह मुआवजा भी ऑनलाइन कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण नहीं कराया है, उन किसानों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा।

डीसी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए ईज ऑफ लिविंग की दिशा में काम किया है। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से मुआवजा राशि ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर उपलब्ध करवाए गए काश्तकार के सत्यापित खाते में सीधे जमा करवाई जाएगी। इसके लिए किसानों को ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल के अलावा और कहीं भी पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है।

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उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया कि संबंधित खसरा नंबर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल पर किसान समय-समय पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। पंजीकरण हेतु मोबाइल नंबर, परिवार पहचान पत्र या ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पंजीकरण नंबर में से कोई एक नंबर अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को आग, बाढ़, ओलावृष्टि, सूखा, शीतलहर, भूकंप , भूस्खलन, बादल फटना, जलभराव, भारी बारिश, कीट का हमला और धूल भरी आंधी के कारण होने वाले फसल नुकसान पर मुआवजा मिलेगा।

फसल नुकसान के मुआवजे के लिए बनाए गए 5 स्लैब :

डीसी ने बताया कि फसल का मुआवजा 5 स्लैब 0 से 24 प्रतिशत, 25 से 32 प्रतिशत, 33 से 49 प्रतिशत, 50 से 74 प्रतिशत और 75 से 100 प्रतिशत में दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन फॉर्म से अपना-अपना लॉगिन करेंगे। वे फसल नुकसान के लिए किसान द्वारा प्रस्तुत आवेदन को देख सकेंगे। फसल हानि का प्रतिशत तथा खसरा नम्बर की फोटो भरेंगे और अपनी प्रतिक्रिया देंगे। एस.डी.एम. अपने लॉगिन फॉर्म से लॉगिन करेंगे और पटवारी, कानूनगो व तहसीलदार द्वारा प्रस्तुत किए गए बेमेल डेटा को देख सकेंगे।

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उन्होंने बताया कि किसान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का पुन: सत्यापन भी एस.डी.एम. द्वारा किया जाएगा। फसल मुआवजे के लिए पंजीकृत क्षेत्र के 4 प्रतिशत हिस्से का उपायुक्त से सत्यापन कराना आवश्यक है। उपायुक्त राशि को आयुक्त के अनुमोदनार्थ भेजेंगे। आयुक्त राशि को नोडल अधिकारी के अनुमोदन के लिए भेजेंगे। नोडल अधिकारी संबंधित जिलों द्वारा भेजी गई राशि के लिए सरकार की स्वीकृति लेंगे और स्वीकृति के बाद राशि सीधे किसान के सत्यापित खाते में डाल दी जाएगी।

 

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