Rewari: रेवाड़ी शहर के कालका रोड़ स्थित सरस्वती विहार के रहने वाले महेश कुमार के पिता ओमप्रकाश एयरफोर्स से रिटायर्ड है। बीसीए की पढ़ाई के दौरान महेश को सॉन्ग बनाने में रुचि थी। इस दौरान जिम में किसी ने उसे कहा कि तुम साइकल मैराथन में भाग लोगे तो वो सॉन्ग को स्पोंसर कर देंगे। उस वक्त वर्ष 2018 में महेश ने पहली बार 21 किलोमीटर की साइकल मैराथन में हिस्सा लिया था। जिसके बाद महेश की साकिलिंग में रुचि बढ़ती चली गई।
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कोरोना की वजह से करीबन 2300 किलोमीटर का सफर किया पूरा
उसके बाद उसने 3 मार्च 2020 को देश के चार महानगरों से होते हुये 6 हजार किलोमीटर साइकल यात्रा की शुरुआत की थी। लेकिन कोरोना की वजह से वो उस वक्त करीबन 2300 किलोमीटर का सफर ही पूरा कर पायें। जिसके बाद Rewari के महेश ने 3 मार्च 2021 को दौबारा साइकल यात्रा शुरू की और 34 दिनों में छह हजार किलोमीटर का साइकल से सफर पूरा किया। इस दौरान वो दिल्ली , मुंबई , कलकत्ता और चेन्नई शहरों के साथ-साथ गाँवों में भी जाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
महेश कुमार ने एक साइकिल यात्रा कश्मीर से कन्याकुमारी तक 6 दिसंबर 2021 से 14 जनवरी 2022 तक पूरी की थी। इस दौरान भी महेश ने करीबन 4 हजार किलोमीटर साइकलिंग करके 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित राज्यों में जाकर पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलख जगाया था। वहीं एक दिन में रेवाड़ी-चडीगढ़ की साइकल यात्रा भी महेश कर चुके है।
साइकलिंग में करियर
महेश (Rewari) का कहना है कि साइकिलिंग में करियर भी बनाया जा सकता है। लेकिन उसके लिए कोच के साथ- साथ अच्छी साइकल की जरूर पड़ती है जो काफी महंगी आती है। साइकलिंग में करियर बनाने के लिए 11 -12 साल की उम्र से साइकिलिंग करना शुरू कर देना चाहिए। महेश ने बताया कि शुरुआत दौर में उसे स्पोर्ट्स डिपार्टमेन्ट से कोच की मदद लेने की कोशिश की थी। लेकिन कोई मदद नहीं मिली।






