Lucknow-Agra Expressway: उत्तर प्रदेश के इस एक्सप्रेसवे पर होते हैं सबसे ज्यादा हादसे, लेन तोड़ने वालों से सख्ती से निपटेगी सरकार

Lucknow-Agra Expressway: उत्तर प्रदेश के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर गलत लेन में चलने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए बड़ी तैयारी की है। गलत लेन में चलने वाले वाहनों के कारण इस एक्सप्रेसवे पर बहुत अधिक हादसे होते हैं, ऐसे ...

Lucknow-Agra Expressway: उत्तर प्रदेश के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर गलत लेन में चलने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए बड़ी तैयारी की है। गलत लेन में चलने वाले वाहनों के कारण इस एक्सप्रेसवे पर बहुत अधिक हादसे होते हैं, ऐसे में यूपी सरकार ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।

302 किमी के इस एक्सप्रेसवे पर हर 5 किमी की दूरी पर लगे 50 सीसी कैमरे व हर 50 किमी दूरी पर लगे छह इंटरसेप्टर कैमरों की मदद से लेन उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान किया जा रहा है।

2017 में शुरू हुआ था एक्सप्रेसवे

जानकरी के अनुसार संबंधित जिलों के आरटीओ व एआरटीओ की मदद से चालान की प्रकिया शुरू की गई है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर आवागमन साल 2017 में शुरू हुआ था।

यूपीडा के आंकड़े बताते हैं कि आगरा से लखनऊ के बीच 302 किमी के इस एक्सप्रेसवे पर रोजाना 3 से 4 हादसे होते हैं, यानी वर्ष 2024 तक 7 साल में इस एक्सप्रेसवे पर 10 हजार से अधिक हादसे हो चुके हैं।

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एक्सप्रेसवे पर होने वालों हादसों में हर तीसरे या चौथे दिन एक व्यक्ति की मौत होती है। यानी इस अवधि में करीब 850 लोगों ने अपनी जान भी गवाई है। अधिकांश हादसे गलत लेन पर वाहन चलाने से होते हैं।

10 जुलाई 2024 को हुआ था बड़ा हादसा

सबसे बड़ा हादसा 10 जुलाई 2024 को बेहटा मुजावर क्षेत्र में अवस्थीखेड़ा गांव के हुआ था। जिसमें लखनऊ से आगरा की ओर जाने पर ओवरटेकिंग लेन में चल रहे दूध टैंकर में पीछे से स्लीपर बस घुस गई थी।

टैंकर व बस के चालक समेत 18 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग घायल हो गए थे। महज बांगरमऊ क्षेत्र में 25 मार्च 2024 से 25 मार्च 2025 तक गलत लेन में वाहन चलाने से 13 हादसे हुए, जिसमें 31 व्यक्तियों की मौत हुई, जबकि 41 लोग घायल हुए।

उन्नाव के एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय प्रतिभा गौतम ने बताया कि यूपीडा की ओर दी गई लिस्ट के हिसाब से जनवरी से अब तक गलत लेन में चलने वाले 393 वाहनाें का चालान किया गया है। प्रति वाहन 500 रुपये का चालान होता है।

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वाहनों के लिए कुछ इस तरह निर्धारित की गई लेन

लखनऊ से आगरा की ओर जाते समय बाईं ओर सबसे किनारे की ओर पार्किंग लेन पीली पट्टी के अंदर बनाई गई है। उसके बगल में भारी वाहनों की लेन फिर कार लेन और इसके बाद डिवाइडर से सटकर ओवरटेकिंग लेन बनाई गई है।

इसी तरह आगरा से लखनऊ की ओर जाने पर बाईं ओर किनारे की ओर पार्किंग लेन, उसके बगल में भारी वाहनों की लेन, इसके बाद कार फिर ओवरटेकिंग लेन बनाई गई है।

यूपीडा के मुख्य सुरक्षाधिकारी रमेश चंद्र दुबे ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर वाहनों के चलने की लेन निर्धारित है। यहां लगे कैमरों से यह पता चल जाता है कि वाहन किस लेन से चल रहे हैं।

इस प्रकार होता है वाहनों का चालान

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कंट्रोल रूम से कैमरों की फुटेज से गलत लेन में चलने वाले वाहनों का फोटो लेकर वाहन नंबर समेत संबंधित जिले के आरटीओ व एआरटीओ को भेज दिया जाता है। वहीं से वाहन का चालान हो जाता है।

आगरा से लखनऊ तक 10 जिलों में 3 माह में 2700 वाहनों के चालान किए जा चुके हैं। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे 302 किलोमीटर लंबा है।
दुर्घटनाओं की मुख्य वजह वाहनों की तेज गति, गलत ओवरटेकिंग, गलत लेन, सड़क घेरकर खड़े वाहन और झपकी लगना है।

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