Free Trial Scam Alert: पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी हेमेन्द्र कुमार मीणा, आईपीएस ने जिला वासियों को मोबाइल ऐप्स पर “3 दिन फ्री ट्रायल” या “₹1 में सब्सक्रिप्शन” के झांसे में आकर हो रही साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी आकर्षक विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं और ट्रायल ऑफर स्वीकार करते ही ऑटो-पे या सब्सक्रिप्शन सक्रिय कर देते हैं।
क्या है फ्री ट्रायल/₹1 सब्सक्रिप्शन स्कैम और कैसे दिया जाता है ठगी को अंजाम
इस प्रकार की ठगी में यूजर को सीमित अवधि के लिए मुफ्त या ₹1 में सेवा देने का लालच दिया जाता है। “I Agree” या “Subscribe” पर क्लिक करते ही बैंक खाते, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या UPI से ऑटो-डिडक्ट की अनुमति सक्रिय हो जाती है। ट्रायल समाप्त होते ही बिना स्पष्ट सूचना के 499, 899 या इससे अधिक राशि हर माह या वार्षिक आधार पर खाते से कटने लगती है। कई मामलों में ऐप डिलीट करने के बाद भी कटौती जारी रहती है।
इस स्कैम के खतरनाक परिणाम
पीड़ित को तब जानकारी मिलती है जब बैंक खाते से कई बार राशि कट चुकी होती है। यह ठगी आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी और असुरक्षा की भावना भी उत्पन्न करती है।
फ्री ट्रायल स्कैम से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा निर्देश
किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता, रेटिंग व रिव्यू जांचें। “Terms & Conditions” पढ़े बिना किसी ऑफर को स्वीकार न करें। बैंक खाते/कार्ड में सक्रिय ऑटो-पे या स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन नियमित रूप से जांचें। अनजान ऐप्स को कार्ड या नेट बैंकिंग की अनुमति न दें। केवल ऐप डिलीट करना पर्याप्त नहीं, पहले सब्सक्रिप्शन आधिकारिक रूप से कैंसिल करें। अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर युवाओं व बुजुर्गों को इस प्रकार की ठगी के बारे में जागरूक करें।
फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें
यदि खाते से अनधिकृत राशि कटे तो तुरंत संबंधित बैंक से संपर्क कर ऑटो-पे बंद करवाएं और आवश्यक हो तो कार्ड ब्लॉक कराएं।
शिकायत कहां करें
किसी भी साइबर ठगी की शिकायत तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं। रेवाड़ी पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के लालच में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें। सतर्कता ही साइबर सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल है।






