मानव अधिकारों के प्रति चलाए जाएंगे जागरूकता कार्यक्रम: पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल ने कहा कि हरियाणा मानव अधिकार आयोग एक सक्षम, जवाबदेह और आधिकारिक संस्था है, जो मानव अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आयोग ...

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल ने कहा कि हरियाणा मानव अधिकार आयोग एक सक्षम, जवाबदेह और आधिकारिक संस्था है, जो मानव अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आयोग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल ने यह बात हरियाणा मानव अधिकार आयोग के 10 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। इस अवसर पर उनके साथ आयोग के सदस्य के.सी.पूरी और दीप भाटिया भी उपस्थित रहें।

उन्होंने कहा कि आयोग अपने क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए आयोग निरन्तर स्वास्थ्य, भोजन, शिक्षा से संबंधित अधिकारों, अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदायों से संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों के संबंध में कार्य करने के साथ-साथ अन्य कमजोर वर्गों जैसे महिलाएं, बच्चे, अशक्त एवं वृद्ध व्यक्तियों के अधिकारों, मानव अधिकार शिक्षा एवं प्रशिक्षण तथा जागरुकता फैला रहा है।

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आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल ने बताया कि अक्तूबर 2012 से अक्तूबर 2022 तक आयोग के पास 23,192 शिकायते दर्ज की गई थी। जिसमें से अब तक 22,454 शिकायतों का निपटान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, आयोग के पास  2017 से 2022 तक आरटीआई के कुल 1692 आवेदन प्राप्त हुए जिसमे से 1689 आवेदनों की सूचना निर्धारित समय के भीतर प्रदान की गई।

उन्होंने बताया कि हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने राज्य सरकार को सुझाव दिया था कि जेल में बंद कैदियों के लिए एक पोलिसी बनाई जाए। जिस पर राज्स सरकार ने एक पोलिसी तैयार की थी। जिसके तहत न्यायिक हिरासत में मौत के मामले में मुआवजा दिया जाता है। हिरासत में मौत के मामलों में आई शिकायत पर आयोग द्वारा की गई सिफारिश पर बनाई गई राज्य सरकार की नीति के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।

कैदियों के बीच झगड़े के कारण, जेल कर्मचारियों द्वारा यातना/पिटाई के कारण, अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा कर्तव्य में लापरवाही के कारण में मृत्यु होने पर 7 लाख 50 हजार रूपये और चिकित्सा अधिकारियों/पैरा मेडिकल द्वारा लापरवाही के कारण मृत्यु होने पर 5 लाख रूपये का मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी इस सुझाव को सही ठहराया और पूरे देश की विभिन्न राज्य सरकारों को यह पॉलिसी अपनाने के लिए कहा।

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उन्होंने बताया कि आयोग ने 30 सितम्बर, 2022 तक विभिन्न केसों में पीड़ितो को 1,83,37,100 रुपये का मुआवजा दिया है। आयोग द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों की खबरों पर प्रतिदिन संज्ञान लिया जाता है और उस आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए भी दिए जाते हैं।

आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल ने बताया कि चण्डीगढ़ के अतिरिक्त गुरुग्राम में भी एक कैंप कोर्ट स्थापित की हुई है जिसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी और मेवात जिले शामिल है। इस कोर्ट में महीने में दो बार केसों का निपटान किया जाता है। इस कोर्ट को इसलिए स्थापित किया गया था उसके साथ लगते जिलों के लोगों को शिकायत देने के लिए दूर न जाना पड़े।

उन्होंने बताया कि आयोग समय-समय पर प्रदेश की जेलो का निरीक्षण करता रहता है। इस दौरान कैदियों के रहन-सहन, स्वास्थ्य, भोजन और उनसे बातचीत की जाती है। गुरुग्राम, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, रेवाड़ी, फरीदाबाद, झज्जर, नारनौल, पलवल, रोहतक, सोनीपत, सिरसा, हिसार, पानीपत और कैथल जेलों का दौरा किया है। उन्होंने बताया कि अगर आयोग के संज्ञान में कोई शिकायत आती है तो उस पर तुरंत कार्यवाही की जाती है।

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आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायधीश एस.के.मितल आयोग ने बताया कि  आयोग बाल देखभाल संस्थानों, वृद्धाश्रमों का भी निरीक्षण करता है। बाल संस्थाओं अर्थात निरीक्षण गृहों, सुरक्षा स्थलों, विशेष गृहों, बाल गृहों, नशा मुक्ति केंद्रों, निराश्रित महिलाओं के लिए गृहों, दृष्टिबाधित एवं बधिर व्यक्तियों के लिए विशेष विद्यालयों, वृद्धाश्रमों का दौरा किया जाता है। इस दौरान कार्यक्रम में आदेश पब्लिक स्कूल चण्डीगढ़ के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से उपस्थित लोगों को जागरूक करने का काम किया।

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