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रेवाड़ी डिपो को मिलेंगी 30 नई बसें, डेढ़ साल से बंद मार्गों पर संचालन होगा शुरू

रेवाड़ी डिपो को मिलेंगी 30 नई बसें, डेढ़ साल से बंद मार्गों पर संचालन होगा शुरू

रेवाड़ी डिपो के जीएम अशोक कौशिक ने बताया कि सितंबर माह में रेवाड़ी डिपो को 30 नई बसें मिल जाएंगी। निश्चित रूप से इसका यात्रियों को लाभ मिलेगा। जिन रूटों पर बसें नहीं चल रही हैं, उन पर भी जल्द ही बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

बसों की कमी से जूझ रहे रेवाड़ी डिपो और जिले की जनता के लिए राहत की खबर है। जल्द ही रेवाड़ी डिपो के बेड़े में 30 नई बसें शामिल हो जाएंगी। इससे डेढ़ साल से बंद रूटों पर बसों के संचालन की उम्मीद की जा सकती है।

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कोरोना काल में परिवहन विभाग ने जिले के कई रूटों पर बसें बंद कर चुका है। वहीं कई रूटों पर बसों की संख्या जरूरत के हिसाब से बहुत कम हैं। बसों की बॉडी गुरुग्राम में तैयार हो रही हैं। दो बसों को चेचिस बनकर भी तैयार हो गई है। सितंबर में इन बसों के मार्ग आने की उम्मीद है। रोडवेज के बेड़े में नई बसें शामिल होने से यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां से प्रतिदिन सैकड़ों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए शहर आते हैं। बावजूद इसके परिवहन विभाग द्वारा इन रूटों पर बसों का संचालन शुरू नहीं किया गया है। जिले के गांव कतोपुरी, काकर कुतीना, चितांडुगरा, अलावलपुर, आईजीयू स्पेशल बस, जाट- जाटी, बहाला व बेरली सहित कई रूट ऐसे हैं जहां पर एक भी रोडवेज बस का संचालन नहीं हो रहा है।

फिलहाल रेवाड़ी डिपो में 151 बसें हैं। इनमें से किलोमीटर स्कीम के तहत शामिल 26 बसें विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। 30 नई बसें मिलने के बाद रेवाड़ी डिपो में बसों की संख्या 181 हो जाएगी।

स्थानीय डिपो में लगातार बसों की संख्या कम हो रही है। विभाग के पास 150 बसों से घटकर 126 बसें ही रह गई हैं। गत माह 7 बसों की आयु 10 वर्ष पूरी होने पर उन्हें खराब घोषित कर दिया है। वहीं पिछले वर्ष भी 10 बसों की आयु सीमा पूरी होने पर उन्हें खराब घोषित कर दिया जाएगा। इस बसों में से 19 बसें अगले वर्ष के शुरुआत में आयु सीमा पूरी होने के बाद खराब घोषित कर दी जाएंगी। इन सभी बसों को दो साल का एक्सटेंशन मिला हुआ है। वहीं पिछले कई वर्षों से विभाग को कोई नहीं बस नहीं मिली है। ऐसे में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही हैं।

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इससे पहले रोडवेज बसों को आठ साल चलने के बाद खराब घोषित किया जाता था। लेकिन बसों की कमी के चलते सभी बसों को दो साल अतिरिक्त संचालन बढ़ाना पड़ा था। पुरानी होने के कारण आए दिन बसों में कोई न कोई खराबी आती रहती है। पुरानी बसें कई बार रास्ते के बीच में खड़ी हो जाती हैं। जिसके रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

जिले के कई रूट ऐसे हैं जिन पर केवल नाममात्र की रोडवेज बसें चलती हैं। वहीं कोरोना महामारी के बाद लगभग अधिकांश रूटों पर रोडवेज बसों की जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। महेंद्रगढ़, नारनौल, पटौदी, झज्जर व धारूहेड़ा जैसे बड़े रूटों पर रोडवेज की जगह परमिट बसों को समय दे दिया गया है। परिवहन विभाग द्वारा जो समय परमिट बसों को दिया गया है, वह विद्यार्थियों के स्कूल व कॉलेजों में आने जाने का है। ऐसे में विद्यार्थियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। परमिट बस संचालक स्कूल व कॉलेज के विद्यार्थियों को देखकर गांव के स्टैंड पर बसों को या तो रोकते ही नहीं, या फिर इतनी दूर रोका जाता है। इसके चलते विद्यार्थी बसों में चढ़ ही नहीं पाते हैं। परमिट बस परिचालकों द्वारा बसों में छात्रों के साथ अक्सर बदसलूकी करते हुए देखा जाता है। कॉलेज छात्राएं भी कई बार इस बारे में विभाग को अवगत भी करा चुकी हैं।

 

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