आजादी अमृत महोत्सव की कड़ी में हरियाणा सरकार द्वारा फसल विविधीकरण के अंतर्गत दलहन व तिलहन की फसलों को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की गयी है। प्रदेश में खरीफ 2022 के दौरान एक लाख एकड़ में दलहनी व तिलहनी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के अन्तर्गत दलहनी फसलें (मूँग व अरहर) को 70,000 एकड़ क्षेत्र में तथा तिलहनी फसल (अरण्ड व मूगँफली) को 30,000 एकड़ में बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डीसी अशोक कुमार गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि दलहन व तिलहन की फसल लगाने वाले किसान को 4,000 रुपये प्रति एकड़ वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। यह योजना दक्षिण हरियाणा के 7 जिलों नामत: रेवाड़ी, भिवानी, चरखी दादरी, महेन्द्रगढ, झज्जर, हिसार तथा नूहं में खरीफ 2022 के दौरान लागू की जायेगी। इसके लिए किसानों को पहले “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर पंजीकृत कराना होगा और सत्यापन उपरान्त सहायता राशि उनके खातों में स्थानान्तरण कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि दाल वाली फसलें मृदा के स्वास्थ्य को अच्छा बनाती हैं और हवा की नाइट्रोजन को जमीन में फिक्स करती हैं , इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है । इस तरह किसानों को खेत में नाइट्रोजन फ़र्टिलाइज़र की कम मात्रा की जरूरत पड़ेगी। तिलहन वाली फसलों को बढ़ावा देने से देश में खाद्य तेल की कमी को भी पूरा किया जा सकेगा।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दलहनी व तिलहनी फसल की बीजाई के लक्ष्य पूरे किए जाएं तथा किसानों को फसलों की अधिक पैदावार के लिए नवीनतम व इन फसलों की अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के बारे में जानकारी दी जाए।








