New Scam Alert: पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने आमजन को नकली मोबाइल टावर (Fake BTS – Base Transceiver Station) और SMS Blast तकनीक के जरिए हो रही एक खतरनाक साइबर ठगी को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अब अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सीधे मोबाइल नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की निजी व बैंकिंग जानकारी खतरे में पड़ रही है।
क्या है Fake BTS / SMS Blast स्कैम और कैसे करते हैं साइबर ठग फ्रॉड
इस प्रकार की ठगी में साइबर अपराधी पोर्टेबल उपकरणों की मदद से नकली मोबाइल टावर तैयार कर लेते हैं, जिन्हें कार, बैग या किसी स्थान पर छिपाकर लगाया जा सकता है। जब कोई मोबाइल फोन नेटवर्क सिग्नल खोजता है, तो वह सबसे मजबूत सिग्नल से कनेक्ट हो जाता है, जो कई बार यह नकली टावर होता है।
इसके बाद मोबाइल को 4G या 5G जैसे सुरक्षित नेटवर्क से हटाकर 2G नेटवर्क पर शिफ्ट कर दिया जाता है, जहां सुरक्षा कमजोर होती है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर अपराधी SMS Blaster के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जी बैंक, KYC, OTP या SIM ब्लॉक होने से संबंधित संदेश भेजते हैं। इन मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही यूजर की निजी और बैंकिंग जानकारी चोरी हो सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
किसी भी अनजान या डर पैदा करने वाले SMS में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें। मोबाइल फोन अचानक 4G/5G से 2G नेटवर्क पर जाए तो तुरंत सतर्क हो जाएं। जहां संभव हो, मोबाइल सेटिंग में 2G नेटवर्क का उपयोग बंद रखें। बैंक या सरकारी विभाग कभी भी SMS के जरिए लिंक भेजकर जानकारी नहीं मांगते।
मोबाइल फोन का सॉफ्टवेयर और सुरक्षा अपडेट समय-समय पर करते रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या मैसेज को नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच करें। अपनी निजी, बैंकिंग या OTP संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। परिवार के सदस्यों, विशेषकर बुजुर्गों को इस प्रकार के साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूक करें।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होती है या इस प्रकार के संदिग्ध मैसेज प्राप्त होते हैं, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाएं। समय रहते की गई शिकायत से आर्थिक नुकसान को रोका जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील की है कि जागरूकता और सतर्कता ही इस प्रकार के तकनीकी साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।






