एम्स निर्माण में देरी , संघर्ष समिति फिर कर रही आन्दोलन की तैयारी

पिछले दो महीनों से जिला प्रशासन से कह रहा है कि अगले हफ्ते रजिस्ट्री प्रकिया शुरू करा दी जायेगी. लेकिन अभीतक किया कुछ नहीं गया है. आपको बता दें कि वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मनेठी में एम्स ...

पिछले दो महीनों से जिला प्रशासन से कह रहा है कि अगले हफ्ते रजिस्ट्री प्रकिया शुरू करा दी जायेगी. लेकिन अभीतक किया कुछ नहीं गया है. आपको बता दें कि वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मनेठी में एम्स बनाने की घोषणा की थी. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने एम्स की घोषणा को पूरा करने की मांग को लेकर लोकसभा चुनाव से पहले महीनों तक बड़ा आन्दोलन किया था. मनेठी में एम्स बनाने का रास्ता बिलकुल साफ़ हो गया था. सरकार ने बजट जारी कर टेंडर प्रकिया भी शुरू कर दी थी. लेकिन तभी फारेस्ट एडवायजरी कमेटी ने उक्त जमीन को फारेस्ट की जमीन बता निर्माण पर आपत्ति लगा दी थी.

 

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जिसके बाद विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने ग्रामीणों से जमीन मांगकर कहा था कि सरकार की नियत साफ़ है. ग्रामीण जमीन देते है तो वो एम्स का निर्माण करा देंगे. लेकिन अब माजरा गाँव ग्रामीण अपनी सहमती से जमीन देने के लिए महीनों से राजी है. बावजूद इसके अलग कारणों के चलते मामला लटका हुआ है. एस्म बनाओ संघर्ष समिति ने कहा कि राव इन्द्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह की राजनितिक लड़ाई के कारण मनेठी में एम्स नहीं बन पाया और अब भी सरकार की नियत में खोट है इसलिए एम्स निर्माण को लटकाया हुआ है.

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AIMS
सरकार एम्स  मामले को  चुनाव तक खींचना चाहती

फिलहाल स्थिति ये है कि जिला प्रशासन कह रहा है कि एम्स का नक्शा पास किया जा चूका है. लैटर और इंटेंट जारी किया गया है यानि भू मालिकों के हस्ताक्षर होने के बाद रजिस्ट्री प्रकिया शुरू की जायेगी. जबकि संघर्ष समिति का कहना है की लैटर और इंटेंट की जरूरत ही नहीं है. ग्रामीण अपनी मर्जी से जमीन देने के लिए दस्तावेज ई भूमि पोर्टल पर अपलोड कर चुके है. जब रजिस्ट्री होगी तब भू मालिकों के हस्ताक्षर लिए जा सकते है. जिससे साफ़ है कि सरकार इस मामले को 2024 के चुनाव तक खींचना चाहती है.

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