Chandiagrh Alcohol Rate: हरियाणा और पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में शराब के शौकीनों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अगले वित्तीय साल में शराब की कीमतें लगभग वो ही रहेंगी। हालांकि, होटलों में शराब थोड़ी महंगी हो सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को घोषित चंडीगढ़ प्रशासन की आबकारी नीति 2025-26 के तहत शराब पर उत्पाद शुल्क और वैट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए अधिकतर विक्रेताओं के लिए लाइसेंस शुल्क भी वही रहने वाला है। हालांकि, होटलों के लिए लाइसेंस शुल्क करीब 20 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है।
खबरों की मानें, तो शराब की दुकानों की नीलामी का पुराना ‘ग्रुपिंग’ सिस्टम भी हटा दिया गया है। यह सिस्टम लोगों को पसंद नहीं था। अब आबकारी विभाग 97 लाइसेंसिंग Unit की नीलामी करेगा। हर यूनिट में केवल एक रिटेल दुकान होगी। पिछले वित्तीय वर्ष में, नीलामी के लिए 84 दुकानें लिस्ट की गई थीं। लेकिन, प्रशासन आठ दुकानों की नीलामी नहीं कर पाया। वहीं चार दुकानें नीलामी के बाद वापस कर दी गईं थी।
नई आबकारी नीति में क्या है खास
खबरों की मानें, तो नई आबकारी नीति में (ग्राहकों, उत्पादकों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और सरकार) सभी के हितों का ध्यान रखती है। पारदर्शिता के लिए, शराब की खुदरा दुकानों का आवंटन ई-टेंडरिंग सिस्टम के जरिए किया जाएगा। ई-नीलामी 13 मार्च से शुरू होगी। इसके अलावा IMFL का कोटा भी वही रखा गया है। देशी शराब और आयातित विदेशी शराब (BIO) का कोटा थोड़ा बढ़ाया गया है, क्योंकि इनकी डिमांड बढ़ी है।
बताया जा रहा है कि दुकानों की नीलामी के लिए भागीदारी शुल्क (2 लाख रुपये) वही रहा है। हालांकि, निर्यात शुल्क को थोड़ा बढ़ाया गया है है। देशी शराब (CL) के निर्यात पर यह शुल्क 1 रुपये प्रति PL से बढ़कर 1.5 रुपये प्रति PL कर दिया गया है। इसके अलावा इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) के निर्यात पर यह शुल्क 2 रुपये प्रति PL से बढ़कर 2.5 रुपये प्रति PL कर दिया गया है। वहीं permit renewal की फीस को भी कम दिया गया है।
लेबल को ऑनलाइन ऑटो-स्वीकृति मिलेगी
कहा जा रहा है कि लाइसेंस/ब्रांड रजिस्ट्रेशन के लिए समय बचाने के लिए, पिछले साल स्वीकृत किए गए लेबल को ऑनलाइन ऑटो-स्वीकृति दी जाएगी। इससे सभी लोगों को आसानी होगी। देशी शराब और आयातित विदेशी शराब के कोटे को और बेहतर बनाया गया है। इसे हर क्षेत्र की खपत को ध्यान में रखकर तय किया गया है। एक ही व्यक्ति/संस्था/कंपनी/फर्म के तहत रजिस्टर्ड दुकानों के बीच स्टॉक ट्रांसफर की परमिशन है। इसके लिए एक उचित स्टॉक ट्रांसफर फीस देनी होगी।








