वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए रेवाड़ी जिले में भी सीएक्यूएम नीति सख्ती से लागू

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-एनसीआर व एडज्वाइनिंग एरिया में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। वायु प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित और कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन ...

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-एनसीआर व एडज्वाइनिंग एरिया में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। वायु प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित और कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जीएनसीटीडी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एनसीआर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्र की एजेंसियों और विभागों के लिए क्षेत्रवार सिफारिशों के साथ एक व्यापक नीति तैयार की है। डीसी अशोक कुमार गर्ग ने यह जानकारी सोमवार को हरियाणा सरकार में मुख्य सचिव संजीव कौशल की विडियो कांफ्रेंस उपरांत संबंधित अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए दी।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को रेवाड़ी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की नीति की पूरी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आयोग का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है। समय-समय पर वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और वायु गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार के आधार पर निर्णय की समीक्षा की जाएगी।

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डीसी ने कहा कि इस नीति में उद्योग, परिवहन, निर्माण और विध्वंस, सड़कों और खुले क्षेत्रों से धूल, सॉलिड वेस्ट और फसल अवशेष जलाना आदि शामिल हैं। यह थर्मल पावर प्लांट, स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सार्वजनिक परिवहन, सड़क यातायात प्रबंधन, डीजल जनरेटर, पटाखे फोड़ने, हरियाली और वृक्षारोपण के माध्यम से वायु प्रदूषण को कम करने से संबंधित है।

इसमें दिल्ली सहित एनसीआर और हरियाणा के गैर-एनसीआर जिलों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण और समय-सीमा का सुझाव दिया गया है। उन्होंने बताया कि आयोग ने स्थिति की गंभीरता के अनुरूप प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू जीआरएपी में विस्तृत रूप से संशोधन किया है, संशोधित योजना दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सीएक्यूएम द्वारा तैयार नयी नीति का हिस्सा है। यह पूर्वानुमान के आधार पर सक्रिय तरीके से प्रतिबंध लागू करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

कूड़ा-कर्कट जलाने व पर्यावरण प्रदूषण करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई : डीसी

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डीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि सरकार व एनजीटी के साथ-साथ जिला प्रशासन कूड़ा-कर्कट जलाने व पर्यावरण प्रदूषण करने वालों से सख्ती से निपटेगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे हुए उनके चालान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए शहरी क्षेत्रों में डीएमसी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में डीडीपीओ की मॉनिटरिंग रहेगी। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सड़कों पर डस्ट व गंदगी न हो तथा सड़कों पर नियमित तौर पर पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।

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ग्रीनरी व प्लांटेशन पर दें जोर, जिले में स्थापित करें नगर वन व नगर वाटिका : डीसी

डीसी गर्ग ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिला में ग्रीनरी व प्लांटेशन पर ध्यान देते हुए मियावाकी तकनीक का प्रयोग करते हुए पौधारोपण करें। जिले में पौधरोपण महाअभियान चलाया जाए और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। मियावाकी तकनीक में आधे से एक फीट की दूरी पर पौधे रोपे जाते हैं।

जीवामृत और गोबर खाद का इस्तेमाल किया जाता है। इस पर मौसम का असर नहीं पड़ता और गर्मियों के दिनों में भी पौधे के पत्ते हरे बने रहते हैं। पौधों का विकास भी तेज गति से होता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिले में नगर वन व नगर वाटिका स्थापित की जाएं।

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पराली जलाने के मामले का भी किया गया मूल्यांकन :

विशेषज्ञ समूह से मिले सुझावों को ध्यान में रखने के अलावा मौजूदा वैज्ञानिक साहित्य, नीतियों, विनियमों, कार्यक्रमों और अलग-अलग क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकारों की फंडिंग रणनीतियों, कार्रवाई की वर्तमान स्थिति और सर्वोत्तम अभ्यास दृष्टिकोण की समीक्षा और जांच की।इसमें आम नागरिक, अनुसंधान निकायों, उद्योग, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों आदि से सुझाव लिए गए।

इस बहु-क्षेत्रीय मूल्यांकन के दायरे में उद्योग, बिजली संयंत्र, वाहन और परिवहन, डीजल जनरेटर सेट, निर्माण-विध्वंस, सड़कों और खुले क्षेत्रों जैसे धूल के स्रोत, बायोमास जलाना, पराली जलाने, पटाखे जैसे मामले शामिल हैं।

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