Haryana News: हरियाणा सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार अब यदि किसी दंपति को IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) या टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक से बच्चा पैदा करना है, तो उन्हें प्रशासन से मंजूरी लेनी होगी। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में लिंगानुपात को सुधारना और IVF तकनीक का दुरुपयोग रोकना है।
हिसार की सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने बताया कि यदि किसी दंपति के पहले से एक या दो बच्चे हैं और वे IVF के माध्यम से तीसरा बच्चा चाहते हैं, तो उन्हें समुचित प्राधिकृत अधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी। डॉ. गहलावत के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि IVF जैसी प्रजनन तकनीकों का अनावश्यक और अवैध उपयोग न हो सके और लिंगानुपात में संतुलन बनाए रखा जा सके।
प्रदेश में अवैध प्रजनन प्रक्रियाओं को रोकने के लिए सरकार ने कठोर कदम उठाए हैं। नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष खतरेजा ने जानकारी दी कि सरकार ने अब तक लगभग 500 अवैध मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) केंद्रों को बंद किया है। इसके अलावा, ऑनलाइन गर्भपात किट बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है।
भारत में IVF तकनीक के लिए कुछ नियम और सीमाएं निर्धारित की गई हैं। भारत में सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम 2021 और सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 के तहत, महिलाओं के लिए IVF कराने की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 55 वर्ष तय की गई है। इसके अलावा, IVF के लिए सीमेन डोनर्स के स्वास्थ्य की जांच की जाती है, जिसमें डोनर की आनुवंशिक बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाया जाता है।








