Instagram Brand Promotion Scam: पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बढ़ रहे फेक बिजनेस पेज व ब्रांड प्रमोशन स्कैम को लेकर नागरिकों को सतर्क करते हुए एक महत्वपूर्ण पुलिस एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कई युवा, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और छोटे व्यापारी इन ऑनलाइन ठगों के निशाने पर आए हैं, जो नकली कंपनियों और फर्जी ब्रांड नामों से प्रमोशन ऑफर देकर आर्थिक ठगी कर रहे हैं।
स्कैम का तरीका: “ब्रांड प्रमोशन” के नाम पर ठगी
फेक ठग इंस्टाग्राम, फेसबुक या अन्य प्लेटफार्म पर किसी नामी ब्रांड के नाम से पेज बनाकर लोगों को “पेड प्रमोशन”, “ब्रांड कोलैबोरेशन” या “सप्लायर पार्टनरशिप” के नाम पर लुभाते हैं। ये अकाउंट देखने में असली जैसे लगते हैं – जिन पर ब्रांड लोगो, प्रोफेशनल पोस्ट और हजारों फॉलोअर्स होते हैं। इसके बाद ये ठग लोगों को फर्जी एग्रीमेंट, ऑफर लेटर या लिंक भेजते हैं। जैसे ही यूजर लिंक या फेक ऐप डाउनलोड करता है, ठग उसके बैंक अकाउंट, कार्ड डिटेल या सोशल मीडिया एक्सेस चुरा लेते हैं। कई बार वे “रजिस्ट्रेशन फीस”, “ब्रांड टैक्स” या “गिफ्ट चार्ज” के नाम पर पैसे मंगवाते हैं और फिर संपर्क तोड़ देते हैं।
एसपी हेमेंद्र कुमार मीणा की अपीलः “हर ऑनलाइन ऑफर की पुष्टि करें”
एसपी हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने कहा कि नागरिक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मिले प्रमोशन या पार्टनरशिप ऑफर को सत्यापित किए बिना स्वीकार न करें। उन्होंने बताया कि कोई भी असली कंपनी हमेशा अपने आधिकारिक ईमेल या वेबसाइट से ही संपर्क करती है, न कि अनजान DM या व्हाट्सएप नंबर से। किसी भी अज्ञात लिंक, QR कोड या फॉर्म में अपनी बैंक या कार्ड जानकारी साझा न करें। यदि कोई “verified collaboration” का ऑफर दे, तो पहले ब्रांड की official mail ID (जैसे @brandname.com) से पुष्टि करें।
सावधान रहें, सतर्क रहें: पुलिस की सलाह
किसी भी लिंक या वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी न डालें। इंस्टाग्राम पर आए “Brand Promotion” या “Paid Collaboration” मैसेज को बिना जांचे स्वीकार न करें। पैसे भेजने से पहले हमेशा Google या ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर वेरिफिकेशन करें। ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक अलर्ट और मोबाइल नोटिफिकेशन ऑन रखें ताकि किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी तुरंत मिल सके। रेवाड़ी पुलिस लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए है।
एसपी हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने कहा कि –
“सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ऑफर असली नहीं होता। असली कंपनियां कभी भी निजी चैट या पेमेंट लिंक से पैसे नहीं मांगतीं। थोड़ी जांच और सावधानी से बड़ी ठगी से बचा जा सकता है।” उन्होंने युवाओं और ऑनलाइन यूजर्स से अपील की कि वे “जांच कर विश्वास करें, लिंक पर नहीं”, और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें।








