किसान हित में हरियाणा सरकार की बड़ी पहल, फसल ख़राब होने पर 72 घंटों के अंदर-अंदर ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करें किसान

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने जानकारी देते हुए कहा कि जिला में हुई बरसात से जिन किसानों की फसल क्षतिग्रस्त हुई है वे किसान 72 घंटों के अंदर-अंदर ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in/farmer/खार्बालोगीं पर क्षतिग्रस्त हुई फसल की भरपाई के लिए आवेदन कर ...

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने जानकारी देते हुए कहा कि जिला में हुई बरसात से जिन किसानों की फसल क्षतिग्रस्त हुई है वे किसान 72 घंटों के अंदर-अंदर ई-फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in/farmer/खार्बालोगीं पर क्षतिग्रस्त हुई फसल की भरपाई के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यह फसल नुकसान की स्थिति में आवेदन, सत्यापन और मुआवजा प्रदान करने की प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में हरियाणा सरकार का ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना व सीड विकास कार्यक्रम के तहत कवर हैं उन किसानों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।

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फसल के मुआवजे के लिए स्लैब निर्धारित
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डीसी ने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से मुआवजा राशि ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पर उपलब्ध करवाए गए काश्तकार के सत्यापित खाते में सीधे जमा करवाई जाएगी। इसके लिए किसानों को ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के अलावा कही भी पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित खसरा नंबर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना व सीड विकास कार्यक्रम के तहत पंजीकृत नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस पोर्टल पर किसान समय-समय पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। पंजीकरण हेतु मोबाइल नंबर, परिवार पहचान पत्र या ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पंजीकरण नम्बर में से कोई एक अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि फसल के मुआवजे के लिए स्लैब निर्धारित किए गए है।

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मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी

डीसी ने बताया कि पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर से लॉगिन फॉर्म से अपना-अपना लॉगिन करेंगे। वे फसल नुकसान के लिए किसान द्वारा प्रस्तुत आवेदन को देख सकेंगे। फसल हानि का प्रतिशत तथा खसरा नम्बर की फोटो भरेंगे और अपनी प्रतिक्रिया देंगे। एसडीएम अपने लॉगिन फॉर्म से लॉगिन करेंगे और पटवारी, कानूनगो व तहसीलदार द्वारा प्रस्तुत किए गए बेमेल डेटा को देख सकेंगे। उन्होंने बताया कि किसान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का पुन: सत्यापन भी संबंधित एरिया के एसडीएम द्वारा किया जाएगा। इसके लिए उसका मेरी फसल मेरा ब्यौरा (एमएफएमबी) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

 

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