
Deepfake: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक और फर्जी एआई कंटेंट (AI content) के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। हेमेन्द्र कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी ने जिलेवासियों को आगाह करते हुए बताया कि इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अधिसूचित सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) नियम, 2026 आगामी 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल माध्यमों पर डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट (AI content) के दुरुपयोग पर रोक लगाना और नागरिकों की प्रतिष्ठा, निजता व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से किसी व्यक्ति की फोटो, वीडियो या आवाज को इस तरह बदलना कि वह असली लगे, गंभीर कानूनी अपराध माना जाएगा। इस तरह की गतिविधियां न केवल व्यक्तिगत सम्मान को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि सामाजिक व्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
क्या होंगे नए नियम?
नए प्रावधानों के तहत:
- AI से बनाए या एडिट किए गए कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा
- ऑडियो कंटेंट में शुरुआत में चेतावनी देना जरूरी
- बिना लेबल या संदिग्ध कंटेंट साझा करना जोखिमपूर्ण और दंडनीय
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक सामग्री 2 घंटे में हटानी होगी
- अन्य नियम-विरुद्ध कंटेंट हटाने की समय-सीमा 3 घंटे तय
एसपी ने स्पष्ट किया कि किसी की फर्जी पहचान बनाकर धोखाधड़ी, बदनाम करना या भ्रम फैलाना अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसे मामलों में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट तुरंत निलंबित किया जा सकता है। दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023, POCSO अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई और जेल का प्रावधान है।
पुलिस की अपील
रेवाड़ी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि:
- बिना सत्यापन वीडियो/फोटो/ऑडियो शेयर न करें
- किसी की छवि या निजता से खिलवाड़ करने वाले कंटेंट से बचें
- AI से तैयार सामग्री को स्पष्ट रूप से घोषित करें
- संदिग्ध सामग्री मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में सूचना दें
एसपी ने कहा कि डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग समाज में भ्रम और अविश्वास फैला सकता है, इसलिए सभी नागरिक सतर्क और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाएं।