आप जानते है कि विश्व रक्तदान दिवस कि शुरुआत कब और कहाँ से हुई थी !

आप जानते है कि विश्व रक्तदान दिवस कि शुरुआत कब और कहाँ से हुई थी !
कोरोना काल में ब्लड डोनर्स ने रोगियों को ब्लड और प्लाज्मा डोनेट कर किया सराहनीय कार्य :यशेन्द्र सिंह /


रेवाड़ी, 14 जून। उपायुक्त यशेन्द्र सिंह ने युवाओं का आह्वान किया है कि वे धर्म, पंथ, जाति, सम्प्रदाय से ऊपर उठकर मानवता की सच्ची सेवा के लिए रक्तदान में बढ़चढ़ कर भाग लें और राष्ट्र का एक जिम्मेदार नागरिक बनें। उपायुक्त यशेन्द्र सिंह ने आज यहां विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर का रिबन काटकार शुभारंभ किया। डीसी ने बताया कि विश्व रक्तदान दिवस हर वर्ष 14 जून को मनाया जाता है। वर्ष 2004 में स्थापित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षित रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने कहा कि रक्दान को महादान यूं ही नहीं कहा जाता, आपका खून किसी का भी जीवन बचा सकता है। रक्तदान महादान है। जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा के लिए रक्तदान का बहुत बड़ा महत्व है। इसलिए सभी को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। महामारी के दौरान, जब लॉकडाउन के चलते कहीं भी जाना वाकई मुश्किल था और अन्य कई चुनौतियां भी थीं, उसके बावजूद जिला में ब्लड डोनर्स ने रोगियों को ब्लड और प्लाज्मा डोनेट किया यह हमारे जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में रक्तदान की बहुत महत्वता है। हम सभी स्वस्थ व्यक्तियों को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए ताकि रक्त की वजह से हम किसी की जिंदगी बचा सकें।


उन्होने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान सेवाएं रेडक्रॉस की मूल गतिविधियों का हिस्सा है और इन सेवाओं को रेडक्रास अपने निस्वार्थ एंव निष्ठावान स्वयंसेवकों के माध्यम से निरंतर जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष पूर्व रेवाडी जिला के ब्लड बैंक में ब्लड रखने की जगह भी नहीं थी हमारे जिला के युवाओं ने रक्तदान शिविर लगाकर कई बार रिकार्ड से उपर रक्तदान किया है।
उन्होने कहा कि सम्पूर्ण मानवता कोविड-19 महामारी से लगातार संघर्ष कर रही है, ऐसे समय में जब रक्तदान की आवश्यकता पड़ी तो युवाओं द्वारा मानवता की रक्षा के लिए स्वैच्छिक रक्तदान किया गया, जिससे सेकडों लोगों को नया जीवन प्राप्त हुआ है। बहुत सी ऐसी गंभीर बीमारियाँ हैं जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर, थैलेसीमिया, हिमोफिलिया आदि जिनमें रक्त की निरंतर आवश्यकता रहती है ऐसे में रक्तदाताओं ने लगातार रक्त की आपूर्ति बनाए रखी।

क्यों मनाते हैं विश्व रक्त दाता दिवस
  14 जून को नोबल प्राइस विजेता कार्ल लैंडस्टेनर का जन्म हुआ था। यही वे साइंटिस्ट हैं, जिन्होंने ्रक्चह्र ब्लड ग्रुप सिस्टम खोजने का श्रेय मिला है। ब्लड ग्रुप्स का पता लगाने वाले कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन के दिन ही विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। कार्ल लैंडस्टीनर के द्वारा ब्लड ग्रुप्स का पता लगाए जाने से पहले तक ब्लड ट्रांसफ्यूजन बिना ग्रुप के जानकारी होता था। इस खोज के लिए ही कार्ल लैंडस्टाईन को सन 1930 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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