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रेवाड़ी – जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद कर रहा नगर परिषद, अधिवक्ता ने कोर्ट में लगाईं याचिका

रेवाड़ी नगर परिषद् जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद कर रहा है. रेवाड़ी शहर की ट्रैफिक लाइट्स इसका बड़ा उदहारण है. जहाँ करीबन 15 वर्षों में दो बार लाखों रूपए खर्च करके ट्रैफिक लाइट्स लगाईं गई . लेकिन दोनों ही बार लाइट्स जब से लगी है जब से बंद पड़ी रही. ट्रैफिक लाइट्स होने के बावजूद वर्षों से बंद पड़ी देख रेवाड़ी के अधिवक्ता सुनील भार्गव ने पुब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में याचिका लगाईं. याचिका के बाद नगर परिषद् हरकत में आया और दिखाने के लिए एक –दो चौक पर लाइट्स चालू भी कर दी गई है. इसके आलावा अधिकाँश चौक –चौराहों पर ट्रैफिक लाइट्स आज भी बंद पड़ी हुई है.

रेवाड़ी शहर के 5 किलोमीटर लम्बे सरकुलर रोड़ पर करीबन 15 वर्ष पहले पहली बार 4-5 चौक पर ट्रैफिक लाइट्स लगाईं गई थी. जो लाइट्स कंडम होकर हटा दी गई. लेकिन चालू कभी नहीं हुई. इसी तरह बीजेपी सरकार आने पर करीबन 5 साल पहले बाईपास स्थित अभय सिंह चौक, पायलट चौक , सरकुलर रोड़ पर नाइवाली चौक , झज्जर चौक, धारूहेड़ा चुंगी, अम्बेडकर चौक , बावल चौक और भाड़ावास चौक पर ट्रैफिक लाइट्स लगाईं गई थी. ये लाइट्स लगने के बाद एक – दो बार तो चालू की गई. लेकिन आज इनकी ट्रैफिक लाइट्स की हालत भी खस्ता है. दुर्भाग्य की बात ये है कि ट्रैफिक लाइट्स के मेंटिनेंस के नाम पर भी जनता के पैसों को बर्बाद किया गया है.

 

नगर परिषद का ट्रैफिक लाइट्स मेंटिनेंस को लेकर विवाद

वर्ष 2018 में अधिवक्ता सुनील भार्गव ने पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में नगर परिषद को पार्टी बनाकर याचिका लगाईं थी. इस दौरान कोरोना और अलग –अलग कारणों की वजह से मामला लंबित रहा. जिसके बाद अब इस मामले में सुनवाई है और कोर्ट ने नगर परिषद को नोटिस देकर जवाब तलब किया है. इसे पहले नगर परिषद का ट्रैफिक लाइट्स मेंटिनेंस को लेकर विवाद चला. जिस विवाद में पुलिस इस नगर परिषद् प्रोपर्टी बताकर खुद को बेबस साबित करती रही और नगर परिषद ट्रैफिक लाइट्स को पुलिस की जिम्मेवारी बताकर पल्ला झाड़ती रही. जिसके बाद कोर्ट ने ट्रैफिक लाइट्स को नगर परिषद की प्रोपर्टी बताया है. साथ ही संचालन की जिम्मा पुलिस को सौंपा था.

 

कोर्ट के नोटिस के बाद नगर परिषद ने झज्जर चौक, भाड़ावास गेट और अम्बेडकर चौक पर ट्रैफिक लाइट्स को चालू कराया है. जो अभी भी प्रोपर वर्क नहीं कर रही है. इसके आलावा बाकी चौक चौराहों पर लाइट्स टूटी हुई पड़ी है. या चलने की हालात में नजर नहीं आती है. अगर लाईट चालू भी हो जाती है तो लोग नियमों का पालन करें उसके लिए ग्राउंड पर कोई इंतजाम नहीं है. अधिवक्ता सुनील भार्गव ने अब पीडब्ल्यूडी को भी पार्टी बनाया है. ताकि ट्रैफिक सांकेतिक चिन्ह लगाने के आलावा बाकी कार्य भी कराएं जाएँ.

 

नगर परिषद ट्रैफिक लाइट्स का सवाल पूछे जाने पर एक ही रटारटाया जवाब देती है कि जल्द ट्रैफिक लाइट्स चालू कराई जायेगी. लेकिन इतने वर्षों से ट्रैफिक लाइट्स की स्थिति क्या है वो सबके सामने है. बहराल 30 मई को कोर्ट में इस मामले की सुनवाई है. ऐसे में देखना होगा कि क्या सुचारू रूप से लाइट्स चालू कराने के लिए क्या वाक्य ही नगर परिषद कोई कदम उठाता है या फिर महज दिखावें के लिए लाइट्स चालू कराई जायेगी .

 

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