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रेवाड़ी जिला में पराली जलाने पर प्रशासन व सीएक्यूएम सख्त, भारी जुर्माने का प्रावधान

सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए हैं। यदि कोई भी किसान पराली जलाते पाया जाता है, तो उसके ऊपर भारी जुर्माने का प्रावधान है।

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र-एनसीआर व एडज्वाइनिंग एरिया में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की ओर से व्यापक नीति बनाते हुए बड़ा कदम उठाया गया है। वायु प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित और कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जीएनसीटीडी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एनसीआर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्र की एजेंसियों और विभागों के लिए एक व्यापक नीति तैयार की है,जिसकी दृढ़ता से पालना की जाए।

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने यह जानकारी सोमवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चेयरपर्सन एम.एम कुट्टी की विडियो कांफ्रेंस उपरांत संबंधित अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए दी। चेयरमैन के साथ मुख्य सचिव हरियाणा संजीव कौशल व हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन भी वीसी से जुड़े।

डीसी ने संबंधित अधिकारियों को रेवाड़ी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की नीति की पूरी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आयोग का मानना है कि वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है। पराली के समुचित प्रबंधन के साथ ही समय-समय पर वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और वायु गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार के आधार पर निर्णय की समीक्षा की जाएगी।

पराली जलाने पर सख्त केंद्र सरकार व सीएक्यूएम :

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि अब किसानों के लिए पराली जलाना बहुत भारी पड़ सकता है, जिसके लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) सख्त है। उन्होंने कहा कि खरीफ फसल की कटाई के बाद खेत में फसलों के बचे हुए अवशेष जिसे पराली कहा जाता है। इसे नष्ट करने के बाद ही किसान खेत में अगली फसल की तैयार करना शुरू करते हैं।

पराली को नष्ट करने के लिए ज्यादातर किसान इन्हें जलाने की फिराक में रहते हैं। सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए हैं। यदि कोई भी किसान पराली जलाते पाया जाता है, तो उसके ऊपर भारी जुर्माने का प्रावधान है। पराली जलाने को लेकर सरकार किसानों को जागरूक भी कर रही है। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए किसान सरकार की विभिन्न योजनाओं को अपनाकर उनका लाभ उठाएं।

फसल अवशेष जलाकर पर्यावरण प्रदूषण करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, कमेटी गठित : डीसी

डीसी अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि आयोग व एनजीटी के साथ-साथ जिला प्रशासन फसल अवशेष जलाकर पर्यावरण प्रदूषण करने वालों से सख्ती से निपटेगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनके चालान किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति फसल अवशेष न जलाएं इसके लिए विशेष निगरानी रखें तथा इसकी मॉनिटरिंग के लिए उपमंडल स्तर, खंड स्तर व गांव स्तर पर कमेटी गठित की गई हैं।

उपमंडल स्तरीय कमेटी में संबंधित एसडीएम, तहसीलदार, एसडीएओ, एपीपीओ, एएससीओ व एसएमएस, बीडीपीओ, एसडीएम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, खंड स्तरीय कमेटी में संबंधित खंड कृषि अधिकारी, नायब तहसीलदार व बीडीपीओ तथा गांव स्तरीय कमेटी में कृषि विकास अधिकारी, बीटीएम, एटीएम व सुपरवाइजर, राजस्व पटवारी, ग्राम  सचिव सहित नंबरदार व सरपंच शामिल रहेंगे।

ग्रीनरी व प्लांटेशन पर जोर दें नागरिक  : डीसी

डीसी गर्ग ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिला में मियावाकी तकनीक का प्रयोग करते हुए पौधारोपण करें। जिले में पौधरोपण महाअभियान चलाया जाए और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। मियावाकी तकनीक में आधे से एक फीट की दूरी पर पौधे रोपे जाते हैं। जीवामृत और गोबर खाद का इस्तेमाल किया जाता है।

इस पर मौसम का असर नहीं पड़ता और पौधों का विकास भी तेज गति से होता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

 

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