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कापड़ीवास के वार पर सुनील मूसेपुर का पलटवार, बोले राव के आशीर्वाद से ही कापड़ीवास पायें बन पाए थे विधायक

भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य व रेवाड़ी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी रहे सुनील यादव मूसेपुर ने पूर्व विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास, और हरको बैंक के चेयरमैन डॉ अरविन्द यादव पर पलटवार करते हुए कहा है कि कापड़ीवास की कितनी लोकप्रियता है वो जनता जानती है. 2014 का चुनाव रणधीर सिंह कापड़ीवास राव इन्द्रजीत सिंह और भाजपा की बदौलत ही जीत पायें थे. वरना इससे पहले वो 5 बार चुनाव लड़कर देख चुके है. जिन्हें जनता ने नकार दिया था. वहीँ डॉ अरविंद यादव अगर पार्षद का चुनाव लडे तब भी जीत नहीं पायेंगे.

सुनील मुसेपुर ने कहा कि ये जो लोग बीजेपी का सच्चा सिपाही बता रहे है. असल में बीजेपी का नुकसान यही कर रहे है. राव इन्द्रजीत सिंह और वो खुद पार्टी की सदस्यता बढ़ा रहे है. उनके जैसे काफी कार्यकर्ताओं की वजह से ही आज बीजेपी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है.

सुनील  ने कहा कि 5 बार विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले कापड़ीवास केवल एक बार चुनाव जीत पाए, उनका यह आंकड़ा बताता है कि जनता में जनाधार विहीन नेता रहे है। 2014 में भी कापडीवास इसलिए जीत पाए क्योंकि राव इंदरजीत व उनके कार्यकर्ताओं ने घर -घर जाकर पार्टी के लिए वोट मांगने का कार्य किया था। राव इंद्रजीत का ही आशीर्वाद था कि कापडीवास विधानसभा का मुंह देख पाए।

सुनील ने कहा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने उनके कार्य को देखते हुए 2019 में टिकट दी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें योग्य माना होगा तो ही उन्हें टिकट मिली। लेकिन पार्टी द्वारा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के सिद्धांतों का दम भरने वाले नेता ही सबसे पहले बगावत पर उतारू हो गए थे।

इसलिए इन नेताओं को बताना चाहिए कि पार्टी के इतना सम्मान देने के बाद भी इन्होंने पार्टी की खिलाफत क्यों की !  इन नेताओं ने पार्टी को अपनी संपत्ति समझ रखा है कि केवल इन को ही टिकट मिले किसी आम कार्यकर्ता को नहीं। यह आरोप हम पर लगाने से पहले खुद अपने गिरेबान में झांके ।

मुसेपुर ने कहां की विधानसभा चुनाव में पार्टी से गद्दारी करने वाले इन नेताओं का गठजोड़ आज भी जारी है।  इन नेताओं का एक साथ में आना और एक साथ राव के खिलाफ बोलना विधानसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ गठजोड़ का आज भी प्रमाण है। नगर परिषद चुनाव में भी इन नेताओं का गठजोड़ पार्टी के विरोध में था। इन नेताओं ने विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की अपील का विरोध  कर दिखाया था कि पार्टी के सिद्धांत उनके लिए कोई मायने नहीं रखते।

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