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आईटीआर वेरिफिकेशन के लिए 1 अगस्त से 120 दिन के बजाय मिलेगा 30 दिन का समय

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आईटीआर सत्यापन की अवधि 120 से घटाकर 30 दिन कर दी है। आईटीआर दाखिल करने वाले करदाताओं को इसका सत्यापन कराना जरूरी है।

वित्त वर्ष 2021-22 और आकलन वर्ष 2022-23 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की डेडलाइन समाप्त होने के बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आईटीआर सत्यापन की अवधि 120 से घटाकर 30 दिन कर दी है। आईटीआर दाखिल करने वाले करदाताओं को इसका सत्यापन कराना जरूरी है। यह नया नियम 1 अगस्त 2022 से लागू हो गया है। अगर कोई 1 अगस्त से आईटीआर भरता है तो वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन ही मिलेंगे।

 

30 दिन का सत्यापन समय

सीबीडीटी ने आज एक अधिसूचना में कहा कि जिन करदाताओं ने अपना आईटीआर 31 जुलाई तक दाखिल कर दिया है, उन्हें आईटीआर सत्यापन के लिए 120 दिन का समय मिलेगा। आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई है, जिससे अब आईटीआर फाइल करने पर विलंब शुल्क लगेगा। वहीं अब विलम्ब शुल्क के साथ आईटीआर भरने वालों को सत्यापन के लिए 30 दिन का ही वक्त मिलेगा। आईटीआर सत्यापन की नई व्यवस्था एक अगस्त, 2022 से लागू हो गई है।

 

बता दें कि अगर अभी तक किसी ने आयकर रिटर्न नहीं भरा है तो 5000 रुपए जुर्माना के साथ भरना होगा। हालाकि अगर किसी करदाता की सालाना आय 5 लाख रुपए से ज्यादा है, तो उसे विलंब फीस के तौर पर 5000 रुपए जमा करने होंगे, जबकि अगर 5 लाख रुपए से कम है, तो 1000 रुपए की लेट फीस लगेगी।

करीब कुल 5.78 करोड़ करोड़ आईटीआर दाखिल

हालांकि, अभी तक आयकर विभाग का फाइनल आंकड़ा नहीं आया है, लेकिन 31 जुलाई को रात 11 बजे तक 5.73 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किये गए। इसमें सिर्फ एक दिन में ही 67,97,067 लाख रिटर्न जमा हुए, जबकि अंतिम एक घंटे में 4,50,013 लाख करदाताओं ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल किया।

 

आयकर विभाग ने आईटीआर जमा करने के लिए 31 जुलाई की अंतिम समय-सीमा तय की थी, इसलिए रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया मध्यरात्रि तक चली। अब आईटीआर दाखिल करने वालों को विलंब शुल्क देना पड़ेगा। विभाग के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में कुल 5.89 करोड़ आईटीआर दाखिल किए गए थे।

 

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