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देश ने बनाया रिकॉर्ड, आजादी के 75 साल बाद भारतीय तोप ने दी सलामी

इस बार लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने सेना द्वारा बनाए जा रहे स्वदेशी हथियारों का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद पहली बार ये संभव हुआ है कि लाल किले से सलामी के लिए स्वदेशी तोप का इस्तेमाल किया गया।

देश आज 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव में मनाया जा रहा स्वतंत्रता दिवस अपने आप में खास है। लेकिन इस बार लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने सेना द्वारा बनाए जा रहे स्वदेशी हथियारों का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद पहली बार ये संभव हुआ है कि लाल किले से सलामी के लिए स्वदेशी तोप का इस्तेमाल किया गया।

 

होवित्जर तोप से 21 तोपों की सलामी

दरअसल, लाल किले पर औपचारिक 21 तोपों की सलामी के दौरान पहली बार स्वदेशी होवित्जर तोप, उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) फायर की गई। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज लाल किले पर भारत में बनी तोप से ही सलामी दी गई है। बीते 75 सालों से इस एक आवाज के लिए हमारे कान तरस रहे थे।

आत्मनिर्भर भारत सभी का दायित्व

पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, ये हर नागरिक का, हर सरकार का, समाज की हर एक इकाई का दायित्व बन जाता है। आत्मनिर्भर भारत, ये सरकारी एजेंडा या सरकारी कार्यक्रम नहीं है। ये समाज का जनआंदोलन है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है। पीएम मोदी ने भारत में बनी तोप के लिए सेना के अफसरों को धन्यवाद दिया।

 

DRDO ने किया है निर्माण

होवित्जर तोप DRDO द्वारा बनाया गया है। इस तोप की गिनती दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली तोपों में होती है। इसका तोप का रेंज 48 किलोमीटर है। यह माइनस 30 डिग्री की ठंड हो या 75 डिग्री की गर्मी, यह हर मौसम में काम करता है। लेफ्टिनेंट कर्नल गगनदीप सिंह संधू फायरिंग इंस्ट्रक्टर नायब सूबेदार गुलाब वाबल के साथ गन यूनिट की कमान संभाली।

 

अब जब देश अमृत काल का उत्सव मना रहा है और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना के साथ आगे बढ़ रहा है।  केंद्र सरकार मेड इन इंडिया को बढ़ावा दे रही है। इसलिए लाल किले पर देश में बने तोपों से सलामी देने का फैसला किया गया। इससे पहले 15 अगस्त के कार्यक्रम में  ब्रिटिश पाउंडर्स-गन से तोपों से दी जाती थी।

 

भारत में 21 तोपों की सलामी का इतिहास

भारत में इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। लेकिन किसे कितनी तोपों की सलामी दी जाएगी, इसका एक नियम था। ब्रिटिश सम्राट को 101 तोपों की सलामी दी जाती थी जबकि दूसरे राजाओं को 21 या 31 की। आजादी से पहले यहां राजाओं और जम्मू-कश्मीर जैसी रियासतों के प्रमुखों को 19 या 17 तोपों की सलामी दी जाती थी। तोपों की सलामी को काफी बड़ा सम्मान समझा जाता है। लेकिन फिर ब्रिटेन ने तय किया कि अंतर्राष्ट्रीय सलामी 21 तोपों की ही होनी चाहिए।

 

1947 में भारतीय स्वतंत्रता से पहले भारत के वायसराय को 31 तोपों की सलामी देकर एक अनोखी विदाई दी गई। 1947 के बाद भारत के गवर्नर-जनरल (1947-1950) और भारत के राष्ट्रपति के लिए 1950 से लेकर 1971 तक सम्मानित करने के लिए 31-तोपों की सलामी को बरकरार रखा गया था।  जबकि आजादी तक भारत के कई पूर्व राजकुमार, राज्य प्रधानों और रियासतों के सैकड़ों जागीरदार को 21- तोपों की सलामी मिलती थी। लेकिन 1971 में इसे बदल कर राष्ट्रपति को 21-तोपों की सलामी कर दिया गया और जब पूर्व राज्य राजकुमारों को तोपों की सलामी देने का विशेषाधिकार रद्द कर दिया गया था।

 

स्वतंत्रता दिवस पर 21 तोपों की सलामी

भारत में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। सलामी 21 बंदूकों से नहीं, बल्कि भारतीय सेना की 1941 में बनी 7 तोपों (जिन्हें ‘25 पाउंडर्स’ कहा जाता है) से दी जाती रही है। इस बार पहली बार इसके साथ होवित्जर तोप को सलामी के लिए शामिल किया गया।

 

वहीं राष्ट्रगान शुरू होते ही पहली सलामी दी जाती है और ठीक 52 सेकंड बाद आखिरी सलामी दी जाती है। 21 तोपों को लगभग 2.25 सेकेंड के अंतराल पर फायर किया जाता है ताकि राष्ट्रीय गान के पूरे 52 सेकंड में प्रत्येक तीन राउंड में 7 तोपों को लगातार फायर किया जा सके।

 

 

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