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रेवाड़ी के दसवीं के छात्र ने किया कमाल, बनाई को-टर्मिनेटर शील्ड

रेवाड़ी के दसवीं के छात्र ने किया कमाल, बनाई को-टर्मिनेटर शील्ड

टेक्नोलोजी के बदलते इस दौर में रेवाड़ी के दसवीं के छात्र ने को- टर्मिनेटर शील्ड बनाकर कमाल कर दिया है.  जिन्होंने एक ऐसी को-टर्मिनेटर शील्ड को डिजाइन करके तैयार किया है. जिसे इस्तेमाल करने पर मेडिकल स्टाफ को पीपीई कीट पहनकर इलाज करने वाली दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा . यानी ये को-टर्मिनेटर शील्ड एयर कूलिंग टेक्नोलोजी से लैस है, एयर फिल्टर , मोबाइल ऐप से कनेक्टविटी सहित तमाम फीचर्स इस शील्ड में जोड़े गए है. छात्र हार्दिक का कहना है बॉर्डर पर सर्दी-गर्मी में तैनात हमारे जवानों के लिए भी इस शील्ड का इस्तेमाल किया जा सकेगा,  जिसके लिए वो शील्ड को बुलेट प्रूफ बना रहे है.

हार्दिक का कहना है कोरोना काल में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ ने काफी कठनाइयों का सामना करके लोगों को इलाज किया और काफी डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ ने अपनी जान भी गँवा दी. जिनकी परेशानी को देखते हुए उन्होंने को –टर्मिनेटर शील्ड का आइडिया आया . जिसके बाद उन्होंने करीबन छह माह इस प्रोजेक्ट पर काम किया. जिसमें वो कामयाब भी हुए है. हार्दिक की उम्र 16 वर्ष है जो मूल रूप से हरियाणा के अंबाला के रहने वाले है. और रेवाड़ी में रहते है . जो रेवाड़ी के कम्ब्रेज स्कूल में दसवीं के छात्र है. हार्दिक का कहना है कि इस को-टर्मिनेटर शील्ड बनाने से पहले उन्होंने काफी डॉक्टर्स से बातचीत की थी कि उन्हें किस तरह की दिक्कतें सामने आई . पीपीई कीट पहनकर इलाज करने से डॉक्टर्स को गर्मी , घुटन और साँस फूलने जैसी परेशानियों सहित विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ा.  जिससे देखते हुए हार्दिक ने शरीर के तामपान को मेंटेन करने के लिए को-टर्मिनेटर शील्ड को बना दिया. हेलमेट नुमा दिखने वाले इस को – टर्मिनेटर शील्ड का कैसे इस्तेमाल होगा , कैसे ये डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ के लिए कारगर साबित होगी. ये हार्दिक की जुबानी ही सुनियें ..

हार्दिक का कहना है कि इस शील्ड का वाईजर एंटी फोग है, जिसके ऊपर के हिस्से में एक इमरजेंसी बटन लगाया गया है. जो मोबाइल एप के जरिये एक ऑटो मैसेज सेंड कर देगा . इसी तरफ से इस शील्ड में एक पाइप के जरिये तामपान को अपने अनुकूल के हिसाब से बनाया जा सकता है. 300 ग्राम की इस शील्ड को ठंडा रखने के लिए करीबन 10 इंच का एक कूलिंग सिस्टम बनाया गया है. जिसमें आइस जेल डालकर इस्तेमाल किया जायेगा .

साथ ही एक ख़ास आइयोनाइजर नाम के एक डिवाइस को इसके साथ ही जोड़ा गया है. जिससे कोई भी वायरस शील्ड बनाने वाले व्यक्ति से 6 मीटर दूर ही रहेगा . हार्दिक का कहना है कि अभी कूलिंग सिस्टम का साइज थोडा बड़ा है ..जिसे छोटा करने पर भी काम किया जा रहा है.  साथ ही इस शील्ड को बुलेट प्रूफ बनाकर देश की सेवा में सर्दी गर्मी में बोर्डर पर तैनात जवानों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा . जिसके लिए वो अभी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है.

बहराल हार्दिक ने अपने प्रोजेक्ट पेटेंट करा लिया है . ताकि कोई इसे कॉपी ना कर सकें. वहीँ स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल कराये जाने के लिए आईसीएमआर में पंजीकरण के लिए काम किया जा रहा है. इससे पहले भी हार्दिक पोपुलर सोशल चैटिंग मोबाइल एप्लीकेशन की तरह एक एप बनाकर कमाल कर चुके है.

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