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बिजली: देश में सिर्फ चार दिनों के लिए ही बचा कोयले का स्टॉक

बिजली: देश में सिर्फ चार दिनों के लिए ही बचा कोयले का स्टॉक

ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन केंद्रों में कोयले का स्टॉक बहुत कम हो चुका है।बता दें कि देश में 70 फीसदी बिजली उत्पादन  कोयले  के द्वारा ही होता है। जानकारी के मुताबिक कुल 135 थर्मल पावर प्लांट्स में से 72 के पास कोयले का तीन दिन से भी कम का स्टॉक बचा हुआ है। जबकि 50 पावर प्लांट ऐसे है जहां कोयले का चार से 10 दिन का स्टॉक है।2021 के अगस्त-सितंबर महीने में कोयले की खपत 2019 के मुकाबले 18 फीसदी तक बढ़ गई है। भारत के पास बहुत बड़ा कोयला का भंडार है, लेकिन खपत बढ़ने से इसपर बुरा प्रभाव पड़ा है।

ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि बिजली संकट के पीछे एक वजह कोरोना काल भी है जिसमें दफ्तर के काम से लेकर अन्य काम घर से ही निपटाए जा रहे थे और लोगों ने इस दौरान जमकर बिजली का इस्तेमाल किया। दूसरी वजह हर घर बिजली देने का लक्ष्य, जिससे पहले के मुकाबले बिजली की मांग काफी बढ़ी हुई है। ऊर्जा मंत्रालय के एक आंकड़े के अनुसार 2019 में अगस्त-सितंबर महीने में बिजली की कुल खपत 10 हजार 660 करोड़ यूनिट प्रति महीना थी। जो   2021 में बढ़कर 12 हजार 420 करोड़ यूनिट प्रति महीने तक पहुंच गया है।

दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि भारी बारिश के कारण खदानों में पानी भर गया है जिसकी वजह से कोयले की निकासी नहीं हो पा रही है। केवल यूपी ही नहीं पूरे देश में कोयले का संकट खड़ा हुआ है। जिन बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक कम रह गया है वहां उत्पादन घटा दिया गया है ताकि इकाइयां पूरी तरह बंद करने की नौबत न आए। यूपी में बिजली के उत्पादन में तक रीबन 2000 मेगावाट की कमी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि चूंकि अभी मांग बहुत ज्यादा नहीं है इसलिए स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन, इसी सप्ताह नवरात्रि के साथ शुरू हो रहे त्यौहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना है।

 

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