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हरियाणा को जल्द मिलेगी एक और हाईवे की सौगात: 6 लेन के एनएच 152-डी का निर्माण 80 फीसदी पूरा, आठ जिलों को मिलेगा फायदा

नारनौल से कुरुक्षेत्र के ईस्माईलाबाद तक बनाए जा रहे नेशनल ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेस हाईवे 152-डी ( NH 152 D) का निर्माण कार्य 80 फीसदी पूरा हो चुका है। 20 फीसदी कार्य में ब्रिज एवं क्रॉसिंग, टोल बूथ काउंटर का निर्माण व साइन बोर्ड का काम शेष बचा है, जिसे पूरा करने का कार्य किया जा रहा है। उसे भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

5108 करोड़ रुपये का बजट  

नारनौल दक्षिण पश्चिम से लेकर कुरुक्षेत्र उत्तर पूर्व के गंगहेड़ी तक करीब 230 किलोमीटर बनने वाले इस नेशनल हाईवे को फिलहाल छह लेन बनाया गया है, जिसे आवश्यक्ता पड़ने पर अपग्रेड किया जा सकता है। यह हाईवे नारनौल बाईपास पर एनएच 148-बी से जुड़ेगा जिससे यातायाम सुगम होगा। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जयपुर-नारनौल-अंबाला-चंडीगढ़ का सफर आसान होगा। केंद्र सरकार की ओर से इस हाईवे के निर्माण के लिए 5108 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। जिसकी चौड़ाई 70 मीटर निर्धारित की गई।

हाईवे में 122 ब्रिज व अंडरपास बनाए गए हैं। दिलचस्प बात है कि यह हाईवे किसी भी शहर या गांव के मध्य से नहीं निकाला गया है, न ही इसके बनाते समय यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकी है। सभी शहर व गांव बाईपास रखे गए हैं। कार्य पूरा होने के बाद एक सौ किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की स्पीड वाहन चालकों को चंडीगढ़ जाने में सुविधा होगी। अभी बूचावास से नारनौल तक हलके व भारी वाहन दौड़ने लगे थे, जिनकी एंट्री पर बैन कर दिया गया है। जिसके लिए सड़क पर मिट्टी डाली गई है।

40 अंडरपास बनाए जाएंगे

इस राजमार्ग पर 40 लाइट वाहन अंडरपास और 110 छोटे वाहन अंडरपास बनाए जाने हैं। इसके अलावा सात आरओबी भी बनने प्रस्तावित हैं। इस सड़क मार्ग के दोनों ओर एक लाख 36 हजार 200 पौधे लगाए जाएंगे ताकि पर्यावरण को हरा- भरा बनाया जा सके। इस मार्ग के दोनों ओर 500 मीटर एरिया को कवर किया जाएगा। यह सड़क परियोजना 230 किलोमीटर लंबी है जो गंगहेड़ी से नारनौल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी, रोहतक व चरखी दादरी सहित आठ जिलों की सीमा से गुजरेगा। इस पर 150 अंडरपास और सात आरओबी भी बनाए जाने प्रस्तावित हैं।

8 जिलों को मिलेगा इसका फायदा

इस हाइवे से जिला कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, जींद, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ के लोगों को फायदा होगा। नारनौल बाईपास पर इस हाइवे को एनएच 48बी से जोड़ा जाएगा। इस नए एनएच को बनाने के पीछे प्रदेश के विकास को गति देना और एनएच-1 का लोड कम करना है।

 

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