शिक्षा के व्यवसायीकरण के कारण कम हुआ शिक्षक का सम्मान – शिक्षा मंत्री

शिक्षक दिवस के एक दिन पहले आज  कोसली में शिक्षक सम्मान एवं प्रतिभा प्रोत्साहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया . जिसमें शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने शिक्षकों और प्रतिभाशाली छात्र –छात्राओं को सम्मानित किया .  कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने इस कार्यक्रम का आयोजन कराया था . जहाँ जिले के दसवीं व् बारहवीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र –छात्राओं को सम्मान किया गया . वहीँ बारहवीं में विज्ञान संकाय में प्रदेश की टॉपर छात्रा भावना को एक लाख रूपए और प्रदेश में तीसरें स्थान पर रही छात्रा वर्षा को 50 हजार की राशी देने की शिक्षा मंत्री ने घोषणा की .

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शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के सम्मान को देश की जीडीपी से जोड़ते हुए कहा की जब सम्मान था तब देश की जीडीपी बहुत अच्छी हुआ करती थी …उन्होंने  कहा कि पहले ब्रह्मा , विष्णु  और महेश भगावन से पहले गुरु को मनाते थे , जब देश विश्व गुरु था .  अंगेज जब देश में आये तब भी पाउंड सस्ता और रूपए महंगा था . यानी सम्मान है तो तरक्की है इसलिए हम सबको वहीँ सम्मान दौबारा कायम करना होगा .  शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों का सम्मान कम होने के पीछे शिक्षा का व्यवयसायीकरण  कारण बताया है .  साथ ही उन्होंने कहा की हमें शिक्षकों को केवल एक कर्मचारी ना समझकर उन्हें विशेष सम्मान देना चाहिए क्योंकि वहीँ देश के असली निर्माता है .

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इसके साथ ही उन्होंने कहा की कोरोना काल में अभी स्कूल बंद रखने के गाइडलाइन है ..और  वो स्कूल खोलना चाहते है और सरकार पूरी तरह तैयार भी है . लेकिन केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद ही स्कूल खोले जायेंगे …उन्होंने कहा की कोरोना काल में अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहें है ..उन्होंने स्कूलों को केवल ट्यूशन फ़ीस लेने के निर्देश दिए थे लेकिन प्राइवेट स्कूल संचालक कोर्ट में चले गए और अब कोर्ट में भी सरकार अभिभावकों के हित में पैरवी कर रही है . कोरोना काल में  परीक्षा कराये जाने पर विपक्ष के हल्ले उन्होंने कहा की विपक्ष का विरोध जायज नहीं है . विद्यार्थी परीक्षा देने पर खुश है .

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